क्राइम
बसगांव में फर्जी दस्तावेज से भूमि की रजिस्ट्री कराने के मामले में आरोपियों की जमानत खारिज
सीएन, नैनीताल। जनपद नैनीताल के रामगढ़ क्षेत्र के बसगांव में फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूमि की रजिस्ट्री कराने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी मामले की गंभीरता देखते हुए फर्जी विक्रेताओं की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। थाना भवाली में दर्ज मुकदमा संख्या 36/2025 में यह मामला सामने आया था। शिकायतकर्ता दर्शन पाठक निवासी बसगांव सिमराड़, रामगढ़ ने ग्राम सुरक्षा समिति के साथ मिलकर पुलिस को तहरीर दी थी कि ग्राम पंचायत बसगांव देवदार के खाता संख्या 28 और 54 में दर्ज भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 16 अगस्त 2024 को रजिस्ट्री कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि वास्तविक भूमि स्वामियों की जानकारी के बिना साजिश के तहत यह रजिस्ट्री कराई गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रजिस्ट्री में जिन व्यक्तियों को विक्रेता के रूप में दिखाया गया है, उन्हें गांव में किसी ने कभी देखा नहीं। ग्रामीणों ने फोटो देखकर उनकी पहचान से इंकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन के आधार पर मामले की गहन जांच की। जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि आरोपितों ने फर्जी पहचान बनाकर स्वयं को जमीन मालिक बताकर 13 नाली 7 मुट्ठी भूमि की रजिस्ट्री कर दी। इसके साथ ही शेष भूमि के लिए मुख्तारनामा भी तैयार कराया गया। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया था। विवेचना में सामने आया कि दोनों आरोपित गांव के निवासी नहीं हैं और उनका उक्त भूमि से कोई संबंध नहीं है। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील शर्मा ने बताया कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने बताया कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूमि की रजिस्ट्री कराने की साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि दाखिल खारिज कार्रवाई के समय जो इश्तिहार जारी हुए थे। उसमें बसगांव के ग्राम प्रधान और अन्य काश्तकारों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। जिस संदर्भ में क्षेत्र वासियों ने तहसीलदार न्यायालय में जिलाधिकारी नैनीताल, एसएसपी नैनीताल और कुमाऊँ कमिश्नर को लिखित में शिकायती प्रार्थना पत्र दिया था। इसके बाद कुमाऊं कमिश्नर के निर्देश पर लैंड फ्राड कमेटी ने जांच के बाद शिकायत सही पाए जाने पर कोतवाली भवाली में मुकदमा दर्ज हुआ। यह मुकदमा ग्राम समिति पदाधिकारियों ने दर्ज कराया। जिसमें सह अभियुक्त हरीश चन्द्र पांडेय निवासी सतपुरी हरतोला व सुयाल बाडी निवासी मोहन सिंह व भगवंत सिंह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के दौरान पाया कि अभियुक्त विक्रेताओं जो पता लखनऊ का दर्ज कराया था, वह फर्जी पाया गया। बाद में पुलिस ने अभियुक्त हरीश पांडेय, मोहन सिंह और भगवंत सिंह की मोबाइल की काॅल डिटेल निकालने पर खत्म सिंह, शंकर सिंह की आपस में कई बार वार्ता हुई। बाद में इन्हें अल्मोड़ा जिले गंगानगर देघाट से गिरफ्तार किया। इन अभियुक्तों ने बताया कि 2024 में अभियुक्त हरीश चन्द्र पांडेय निवासी सतपुरी हरतोला ने हमसे संपर्क करा और बताया कि जय किशन और मुरलीधर जोशी के नाम पर ग्राम बसगांव में जमीन है। आप दोनों जय किशन और मुरलीधर जोशी बन कर आ जाओ। इस सौदे में अच्छा मुनाफा होगा। हरीश पांडेय, मोहन सिंह और भगवंत ने नैनीताल होटल में ठहराया और हमारी आईडी लेकर मुरलीधर और जय किशन के नाम पर फर्जी आईडी बनाए। 16 अगस्त 2024 को नैनीताल में 13 नाली सात मुट्ठी जमीन की रजिस्ट्री कराई। शेष भूमि की पावर ऑफ एटॉर्नी हरीश पांडेय ने अपने नाम कराई। न्यायालय ने घटना की गंभीरता को देखते हुए शंकर सिंह और खीम सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी।पुलिस के अनुसार इस पूरे प्रकरण में शामिल अन्य आरोपितों की तलाश जारी है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


























