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विदेशी साधक की साधना भी गच्चा खा गई साइबर ठगों के आगे, 30 लाख रुपयों की ठगी

विदेशी साधक की साधना भी गच्चा खा गई साइबर ठगों के आगे, 30 लाख रुपयों की साइबर ठगी
लोकेंद्र सिंह बिष्ट, उत्तरकाशी।
यह घटना उत्तरकाशी के डुंडा तहसील के ग्राम कुन्सी बरसाली में स्थित महर्षि आश्रम की है। जहां विदेशी साधक से 30 लाख रुपयों की साइबर ठगी हुई है। मामले की प्रारंभिक जांच थाना कोतवाली के अंतर्गत पुलिस चौकी डुंडा में हुई। थाना प्रभारी प्रकाश सिंह राणा ने बताया कि मामले की गंभीरता और इतनी बड़ी साइबर ठगी के चलते प्रकरण को साइबर क्राइम के अंतर्गत साइबर थाना देहरादून में पंजीकृत करवाया गया। पीड़ित ने भी साइबर थाना देहरादून में शिकायत दर्ज कराई है जिसपर साइबर थाना देहरादून ने मामले को सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 के अंतर्गत विभिन्न धाराओं में पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है। भारत में पिछले 30 वर्षों से योगा, ध्यान, साधना और भारतीय रहना सहन में रचे बसे एक अति पढ़े लिखे विदेशी को भनक तक नहीं लगी कि वह ठगी का शिकार हो रहा है। साइबर ठगों की योजना के मुताबिक विदेशी से कुल 68 लाख वसूलने की योजना थी। 68 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी केस की कहानी में साइबर ठगों ने कोलाबा पुलिस स्टेशन मुंबई से भारतीय खुफिया पुलिस अधिकारी बनकर विदेशी को इस कदर अपने जाल में उलझाया कि विदेशी उनके झांसे में आ गया। विदेशी ने पहले अपने उत्तरकाशी स्थित दो अलग अलग बैंक अकाउंट में पैसे एक तीसरे बैंक से ट्रांसफर किए। विदेशी से ऑनलाइन ठगी कर साइबर अपराधियों ने विदेशी से पहले 4 मार्च 2025 को 11 लाख रुपए और 6 मार्च 2025 को 19 लाख 50 हजार 76 रुपए ऑनलाइन ठग लिए, ये सारी रकम उत्तरकाशी उत्तरकाशी स्थित एक्सिस बैंक के अकाउंट से बंधन बैंक में साइबर अपराधियों के खातों में बाकायदा अकाउंट नंबर और कोड के साथ हुई है। जब विदेशी  ने 30 लाख रुपयों की भारी भरकम राशि ठगों को सौंप दी तो पुनः साइबर ठगों का व्हाट्सएप काल शेष 36 लाख रुपयों को ट्रांसफर करने के लिए आता है। पूरी तरह से साइबर ठगों ने विदेशी को साइकोलॉजिकल अपने मोहपाश में फंसा रखा था और विदेशी भी पूर्ण रूप से मानसिक तौर पर साइबर ठगों के चंगुल में था। एक बड़ी रकम चुकाने के बाद जब उसे साइबर ठगों का शेष 36 लाख रुपयों के भुगतान के लिए व्हाट्सएप काल आया तो विदेश ने शेष रकम चुकाने से पूर्व अपने कुछ जर्मन स्थित आश्रम में अपने मित्रों अल्फ्रेड और सोरेन से मामले को साझा किया तो उसके होश उड़ गए जब उसके दोस्तों ने उसे बताया कि वह साइबर ठगों के चंगुल में है। इससे पहले कि 36 लाख रुपयों का भुगतान साइबर ठगों को और होता विदेशी को दोस्तों के माध्यम से जानकारी हो गई कि उसका तो खेला कर दिया साइबर ठगों ने लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और साइबर ठग 30 लाख रुपए ठग चुके थे लेकिन गनीमत ये रही कि विदेशी साधक के 36 लाख रुपए बच गए गनीमत है। पिछले 30 वर्षों से भारत के सुदूरवर्ती जिले उत्तरकाशी के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में क्या कर रहा है। दरअसल पिछले लगभग 30 वर्षों से जर्मन निवासी 83 वर्षीय हर्मन हेनरिच राेडर उत्तरकाशी जिले के डुंडा तहसील के ग्राम कुन्सी बरसाली में महर्षि आश्रम में ष्योग ध्यान और साधना करने में तल्लीन हैं। आश्रम में एक नहीं लगभग 50 विदेशी पुरुष पिछले 30 वर्षों से योग ध्यान और साधना के लिए निवासरत हैं। महेश योगी महर्षि जी के दुनियाभर ने हजारों लाखों शिष्य हैं जो अपना सब कुछ त्याग छोड़ छाड़कर महर्षि जी के शरण में ध्यान योग शांति और साधना के लिए आ गए। महर्षि जी के देश दुनियां में एक नहीं  सैकड़ों आश्रमों की श्रृंखला हैं।। अकेले उत्तरकाशी जिले में इस तरह के दो आश्रम हैं। इसके अलावा स्कूल और दूसरे विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के भी केंद्र हैं। ये विदेशी लोग अपना सब कुछ महर्षि जी और उनकी संस्था को समर्पण और समर्पित कर इन्हीं आश्रमों में साधु के रूप में डेरा डाले रहते हैं। आधुनिक सुख सुविधाओं से सुसज्जित इन आश्रमों में खाने पीने ओर रहने की उम्दा व्यवस्था होती है जैसे किसी पांच सितारा होटलों में होती है। समय से योग ध्यान और साधना के अलावा ये लोग  एकांत में विचरण करते रहते हैं और इनके  नियमित भोजन आदि की व्यवस्था आश्रम प्रबंधन की तरफ से की जाती है। महर्षि जी के इन शिष्यों में दुनियाभर के अलग अलग देशों के लोग शामिल रहते हैं। ऊंचे दर्जे की पढ़ाई लिखाई के बाद महर्षि जी का आकर्षण इनको अपनी ओर खींच लेता है और योग ध्यान और शांति के लिए ये धनाढ्य श्रेणी के करोड़पति अरबपति लोग अपना सर्वस्व त्यागकर महर्षि जी के आश्रमों में चले आते हैं। झक सफेद कपड़ों में घूमते फिरते ये महर्षि जी के साधक अनुयाई सभी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन विदेशियों में गरीब श्रेणी का कोई अनुयायी नहीं होता है। इन्हीं में से एक है 83 वर्षीय हर्मन हेनरिच राेडर है जो साइबर ठगों का शिकार हो गया। इतनी बड़ी साइबर ठगी के बाद ये जरूरी हो जाता है कि साइबर ठगों से अपने आप और अपनों को कैसे  बचा जाए आइ जानते हैं कुछ टिप्स-दरअसल कंप्यूटर, इंटरनेट या नेटवर्क के ज़रिए किए जाने वाले गैरकानूनी काम को साइबर अपराध कहते हैं। साइबर अपराधों में हैकिंग, फिशिंग, वायरस बनाना और वित्तीय चोरी जैसी गतिविधियां शामिल हैं। साइबर अपराध से व्यक्तियों, कारोबारों और सरकारी संस्थाओं को भारी नुकसान हो सकता है। साइबर अपराध एक सामान्य शब्द है जो कंप्यूटर, नेटवर्क या डिजिटल उपकरणों के किसी अन्य सेट का उपयोग करके की जाने वाली असंख्य आपराधिक गतिविधियों का वर्णन करता है। साइबर अपराध को साइबर अपराधियों द्वारा की जाने वाली अवैध गतिविधियों की विशाल श्रृंखला के अंतर्गत माना जाता है। एंटीवायरस और फ़ायरवॉल जैसे सुरक्षा सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करें। विश्वसनीय वेबसाइटों पर जाने से बचें। अज्ञात फ़ाइलों को डाउनलोड करने से बचें। ईमेल के अनुलग्नकों पर सावधानी बरतें। मज़बूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें। संवेदनशील जानकारी ऑनलाइन या सोशल मीडिया पर न शेयर करें। अपने बच्चों को इंटरनेट के खतरों के बारे में बताएं। आपको ये बातें भी ध्यान में रखनी चाहिए। संवेदनशील जानकारी ऑनलाइन या सोशल मीडिया पर न साझा करें। अपने बच्चों को इंटरनेट के खतरों के बारे में बताएं। हर वेबसाइट पर एक ही पासवर्ड न इस्तेमाल करें। किसी अनजान व्यक्ति को अपने डिवाइस का एक्सेस न दें। फ़्री वाई-फ़ाई पर बैंकिंग या अन्य लेनदेन न करें। 

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