धर्मक्षेत्र
श्रीमद् भागवत का श्रवण करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं व भक्ति का उदय होता है
सीएन, ज्योलीकोट/नैनीताल। श्रीमद् भागवत केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि साक्षात कृष्ण का स्वरूप है।”कलियुग में केवल हरि नाम संकीर्तन ही मोक्ष का मार्ग है। श्रीमद् भागवत का श्रवण करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और भक्ति का उदय होता है। गोल्ज्यू धाम चोपड़ा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में प्रवचन करते आचार्य नीरज महादेव ने प्रवचन करते कहा कि धर्म के मार्ग का अनुसरण करते हुए जीवन का आनंद लेना चाहिए। पारंपरिक परिधानों में भव्य कलश यात्रा निकाली गई,जिसमें मुख्य यजमान ललित मोहन बिष्ट, कमला बिष्ट, पुरोहित कैलाश जोशी, गोपाल सिंहजीना, पुष्कर कथायत, हिमांशु,कन्नू बिष्ट,राजू, दिनेश बर्गली सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए, ज्ञान यज्ञ का समापन 31 मार्च को हवन, पूजन प्रसाद वितरण और भंडारे के साथ संपन्न होगा। भक्ति पूर्ण उक्त आयोजन में बड़ी संख्या में लोग सम्मलित हो रहे है।


































