धर्मक्षेत्र
क्रिसमस कल : सेंट जोंस, मैथोडिस्ट, संत निकोलस व कैथोलिक चर्च में होंगे भव्य कार्यक्रम
क्रिसमस कल : सेंट जोंस, मैथोडिस्ट, संत निकोलस व कैथोलिक चर्च में होंगे भव्य कार्यक्रम
नैनीताल में है गोथिक शैली में बने हैं पांचों चर्च, मौना-बाना गांव में भी होंगे कार्यक्रम
चन्द्रेक बिष्ट, नैनीताल। अंग्रेजों द्वारा बसाये गये नैनीताल शहर के चर्च ऐतिहासिक माने जाते है। बुधवार को क्रिसमस के लिए सेट जोंस सहित नगर के पांचों चर्च सजाये गये है। सूखाताल स्थित सेंट जोंस इन द विल्डरनेस प्रोटेस्टेंट चर्च के अलावा मल्लीताल मैथोडिस्ट चर्च, तल्लीताल लेक चर्च यानी कैथोलिक चर्च, राजभवन स्थित सेंट निकोलस चर्च सहित विशपशा आदि में सुबह से खास कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। नैनीताल शहर ही नहीं बल्कि नैनीताल के देवीधुरा के समीप मौना बाना ग्राम में भी अंग्रेजी शासनकाल में बने चर्च में भी गांव के एक दर्जन से अधिक परिवार क्रिसमस मनायेंगे। ज्योलीकोट से पादरी मौना-बाना गांव पैदल पहुंच कर प्रार्थना सभा करवाते है। इस गांव के लोग इस चर्च में पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रार्थना सभा करते आ रहे है। मालूम हो कि वर्ष 1841 में पी बैरन द्वारा नैनीताल की खोज के बाद इसे अंग्रेज हुकूमतों के रहने के लिए मुफीद जगह लगी। यहां 1842 के बाद ईसाई मिशनरियां भी सक्रिय हो गयी। इन मिशनरियों द्वारा नैनीताल में शिक्षक संस्थाओं को खोलने का बीड़ा उठा लिया। इसके साथ ही यहां चर्चो का निर्माण भी शुरू हो गया। सीमित स्थान पर ऐतिहासिक भवनों का निर्माण पाश्चय गौथिक शैली से किया जाने लगा। 1841 के बाद नैनीताल की बसासत के साथ ही अंग्रेजों ने यहां चर्चो का निर्माण भी शुरू कर दिया। मालूम हो कि सेंट जोंस चर्च की स्थापना 1848 में हुई इसे पहले चर्च के रूप में देखा जाता है। इतिहासकार प्रो. अजय रावत के अनुसार 1857 के गदर के बाद नैनीताल में अंग्रेजों की बसासत बढ़ने लगी। यहां इसाई धर्म के अन्य धर्म वर्ग के लोगों ने चर्चों का निर्माण किया। 1858 में मैथेडिस्ट चर्च, 1868 में डाठ स्थित मैथोडिस्ट चर्च, सेंट निकोलस राजभवन चर्च 1869 में तथा सेंट फ्रांसिस कैथोलिक चर्च 1921 में स्थापित हुआ। इसके साथ ही यहां स्कूलों में प्रार्थना सभाओं के आयोजन को छोटे-छोटे आधा दर्जन से अधिक चैपलों का निर्माण भी किया गया। क्रिसमस पर चर्चाें व चैपलों में प्रार्थना सभाएं की जाती हंै।
सेंट जोंस चर्च कुमाऊं का सबसे पहला प्रोस्टेट चर्च
नैनीताल। सूखाताल स्थित सेंट जोस चर्च कुमाऊं का सबसे पहला प्रोस्टेट चर्च भी है। यह चर्च 171 वर्ष पूर्व पहली क्रिसमस सभा आयोजन का गवाह भी है। 171 पूर्व स्थापित इस चर्च की खास विशेषता यह भी है कि यह इंग्लैंड के प्रसिद्ध गोथिक शैली में बने चर्चों की तरह है। आज भी यह यूरोपीय देशों के चर्चों की फेहरिस्त में शुमार है। दरअसल अंग्रेजी दौर में बने सभी पांचों चर्च गोथिक शैली में बने है। लेकिन सेंट जोंस इन द विल्डरनेस प्रोटेस्टेंट चर्च इनमें से खास है। विल्डरनेस चर्च बनाने के लिए अंग्रेजों को घने जंगलों में पर्याप्त जगह चाहिए थी इसके लिए उन्हें सूखाताल में यह स्थान मिला। 1844 में उन्होंने वान्यता यानी विल्डरनेस स्थल सूखाताल में दिखा। सन् 1846 में इस स्थान पर चर्च की नींव रखी गई। यह दो वर्षों में बनकर तैयार हुआ। दो अप्रैल 1848 में यह प्रार्थना सभा के लिए खोला गया। इतिहासविद् प्रो. अजय रावत का कहना है कि दो अप्रैल 1848 में आम लोगों के लिए खोले गये सेंट जोंस चर्च की खास विशेषता यह है कि इस चर्च से सटे गोथिक शैली में बने चर्च की मीनार से दिव्य प्रकाश निकलता है। इसका कारण यह है कि घने जंगलों के बीच बने इस चर्च की मीनार से खुले आसमान से प्रकाश पहुंचता है।
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