Connect with us

धर्मक्षेत्र

रविवार को ब्रह्म मुहूर्त में मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाएं नयना देवी मंदिर में विराजमान कर प्राण प्रतिष्ठा की, पूजा को भक्तों का लगा तांता

सीएन, नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में नंदा महोत्सव बारिश के बावजूद पूरे उत्साह से मनाया जा रहा है आज रविवार को ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर में विशेष पूजा अर्चना के बाद मां नंदा सुंदा की प्रतिमाएं नयना देवी मंदिर में विराजमान कर प्राण प्रतिष्ठा की गई। मंत्रोच्चार से सरोवर नगरी गूंज उठी। ब्रह्ममुहुर्त से ही पूजा अर्चना के लिए भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। नयना देवी मंदिर परिसर नंदा सुंदा मां के जयकारों से गुंजायमान हैं। भक्तों की भीड़ जुटने लगी। श्री राम सेवक सभा द्वारा आयोजित 123 वे श्री नंदा देवी महोत्सव के नंदा सुनंदा की मूर्ति निर्माण में लोक पारंपरिक कलाकारों की कला भव्यता से दिखाई देती है। चंद्रप्रकाश साह के नेतृत्व में हीरा रावत, हरीश पंत, गोधन सिंह, अमर साह, गोविंद सिंह बिष्ट, हिमांशु गुप्ता, नितेश मेहरा, चिराग बिष्ट के साथ मोनिका साह एवं आरती सम्मल, नेहा, मेघा, किरण ने रंग भरकर चित्रकारी कर जीवंत रूप प्रदान किया है। उत्तराखंड की कुलदेवी नंदा नव दुर्गा, पार्वती तथा प्रकृति के नंदा खाट सहित हिमालय में समाहित है। मां नंदा का महोत्सव प्रकृति के प्रति हमें सचेत करता है तो प्रकृति की सुंदरता को भी समझता है। पारिस्थितिकी रूप से अनुकूल प्राकृतिक उत्पादों से बनाए जानी वाली नंदा सुनंदा की मूर्ति का निर्माण लोक पारंपरिक कलाकारों द्वारा किया जाता है उसमें हरे बांस से लोक पारंपरिक कलाकार पतली खपच्ची का निर्माण करते है तथा बॉस बहुत लचीला होता है जिससे मां नंदा सुनंदा का मुख मंडल तैयार किया जाता है। बॉस वानस्पतिक रूप से बम्बूसा के नाम से जाना जाता है। कपास जिससे रुई कहते है ये उभार देने के काम आता है। कपास का वानस्पतिक नाम गॉसिपियम आरबोरियम है। बॉस एवं रुई पवित्र है साथ ही मूर्ति का मुख्य स्तंभ कदली जिसे मूसा परडिसीएका कहा जाता है। मां नंदा सुनंदा मूर्ति में प्राकृतिक रंग से उनका उनका भव्य रूप तैयार होता है। मां का आसन भृंगराज से बनाया जाता है जिसे आर्टीमीसिया के रूप में जानते है वो औषधीय पौधा है। बरसात में खिलने वाला डहेलिया की माला मां को प्रिय है जिसे वानस्पतिक रूप से डहेलिया कहा जाता है। उच्च हिमाली क्षेत्रों में ब्रह्मकमल मां की भक्ति में प्रस्तुत किया जाता है जिसे सौरसिया आबोवालेटा कहा जाता है। मां नंदा को ककड़ी कुकुमिस तथा नारियल कोकोस भेट किया जाने की परंपरा है। मां नंदा जो हिमालय संस्कृति के साथ शक्ति की देवी से रूप में कुलदेवी में पूजित है। विरासत में मिली इस अनूठी परंपरा में मा के कदली वृक्ष तथा डोले को छूने तथा अक्षत चावल औरिजा एवं दूब सायनाडन एवं पुष्प चढ़ाने की अनूठी परंपरा भी इसमें शामिल है। प्रकृति की परंपराएं मानो साक्षात देवी भगवती के रूप में विराजमान होने जा रही है जो उत्तराखंड की संस्कृति ,परंपरा ,लोक उत्सव ,जन मानस के हर्ष तथा विशिष्ट मानवीय परंपरा को प्रदर्शित करती है । प्रकृति के वो उत्पाद जो पारिस्थितिक रूप से गलन शील है तथा मानव सहित पूरे पर्यावरण एवं विश्व को नई ऊर्जा देने का काम करते है। आगामी 5 सितंबर तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान मां नंदा सुनंदा की पूजा अर्चना का दौर निरंतर जारी रहेगा। भक्त जन अपनी परंपरा अनुसार बकरों को पूजा अर्चना के बाद स्लाटर हाऊस में बलि दे संकेगे, लेकिन मंदिर परिसर में बलि प्रतिबंधित रहेगी। मेला परिसर में बच्चों के मनोरंजन की व्यवस्था के साथ ही विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी हैं। स्थानीय लोगों के साथ ही काफी संख्या त्रमें सैलानी भी मेले का आनंद उठा रहे है। मेले के आयोजक रामसेवक सभा के अध्यक्ष मनोज साह ने बताया कि मेले के दौरान महा भंडारे का आयोजन व प्रसाद वितरण भी किया जायेगा। नगर पालिका अध्यक्ष डा. सरस्वती खेतवाल ने तमाम मेलार्थियों से पर्व को सौहार्दपूर्ण रुप से मनाने व शहर में सफाई व्यवस्था बनाने की अपील की है।

More in धर्मक्षेत्र

Trending News

Follow Facebook Page

About

आज के दौर में प्रौद्योगिकी का समाज और राष्ट्र के हित सदुपयोग सुनिश्चित करना भी चुनौती बन रहा है। ‘फेक न्यूज’ को हथियार बनाकर विरोधियों की इज्ज़त, सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने के प्रयास भी हो रहे हैं। कंटेंट और फोटो-वीडियो को दुराग्रह से एडिट कर बल्क में प्रसारित कर दिए जाते हैं। हैकर्स बैंक एकाउंट और सोशल एकाउंट में सेंध लगा रहे हैं। चंद्रेक न्यूज़ इस संकल्प के साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दो वर्ष पूर्व उतरा है कि बिना किसी दुराग्रह के लोगों तक सटीक जानकारी और समाचार आदि संप्रेषित किए जाएं।समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को समझते हुए हम उद्देश्य की ओर आगे बढ़ सकें, इसके लिए आपका प्रोत्साहन हमें और शक्ति प्रदान करेगा।

संपादक

Chandrek Bisht (Editor - Chandrek News)

संपादक: चन्द्रेक बिष्ट
बिष्ट कालोनी भूमियाधार, नैनीताल
फोन: +91 98378 06750
फोन: +91 97600 84374
ईमेल: [email protected]

BREAKING