धर्मक्षेत्र
आपकी राशि के लिए कुछ ऐसा रहेगा रौद्र विक्रम संवत 2026
मेष: नौकरी में पदोन्नति के योग हैं। लेकिन चिंता और शारीरिक परेशानी रहेगी। वृष: भाग्योदय होगा। प्रॉपर्टी में फायदा मिलेगा। लेकिन कामकाज में मन नहीं लगेगा। मिथुन: शुभ काम होंगे। मेहनत ज्यादा होगी। परिवार में मतभेद, तनाव और धोखे की आशंका है। कर्क: शुभ काम होंगे। नौकरी में पदोन्नति के योग हैं, लेकिन खर्चे बढ़ेंगे। बीमारियों की आशंका भी है। सिंह: नौकरी और बिजनेस में फायदा होगा। प्रॉपर्टी संबंधी जरूरी काम होंगे। सेहत का ध्यान रखना होगा। कन्या: दुर्घटनाएं, तनाव और विवाद के योग हैं। लोगों से मतभेद होंगे। शुभ काम होंगे। तुला: बिजनेस में फायदा होगा, लेकिन लेन-देन में सावधान रहें। धोखा हो सकता है। यात्राएं और भागदौड़ रहेगी। वृश्चिक: नौकरी-बिजनेस और प्रॉपर्टी के कामों में फायदा होगा। विवाद और कामकाज में देरी के योग भी बनेंगे। धनु: मानसिक आर्थिक चिंता रहेगी। काम में मन नहीं लगेगा। ज्यादा मेहनत से ही सोचे हुए काम पूरे होंगे। मकर: नौकरी में असंतुष्टि, स्थान परिवर्तन, विवाद और नुकसान की आशंका है। मनचाहे काम देरी से पूरे होंगे। कुंभ: धन हानि और विवाद के योग हैं। कामकाज में रुकावटें आएंगी। पुरानी गलतियों की वजह से परेशानी बढ़ेगी। मीन: गैर जरूरी खर्चा बढ़ेगा, लेकिन सोचे हुए काम पूरे होंगे। बिजनेस और नौकरी में फायदा मिलेगा।ब्रह्माजी ने इसी दिन सृष्टि की रचना की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (इस साल 2 अप्रैल) को सृष्टि की रचना की थी। तब से इस तिथि को कालगणना में खास माना गया है। इसे नव संवत्सर पर्व के रूप में मनाया जाता है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के नाम से जब विक्रम संवत शुरू किया गया, तो चैत्र प्रतिपदा से ही शुरुआत मानी गई। चैत्र नवरात्रि व्रत भी इसी तिथि से शुरू होता है। वृत राम नवमी तक चलते हैं। नव संवत के पहले दिन देश में कई जगहों पर गुड़ी पड़वा और युगादी के रूप में नव वर्ष मनाया जाता है। सिंधी लोग इसी दिन चेती चंद के रूप में नया साल मनाते हैं। कैसे तय होते हैं संवत्सर के राजा-मंत्री चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के जिस वार से नया साल शुरू होता है, वही संवत का राजा होता है। इस बार नव संवत शनिवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इस साल के राजा शनि होंगे। वहीं, जिस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, उस वार का स्वामी मंत्री होता है। इसलिए इस बार गुरु मंत्री रहेंगे। एक नहीं नौ दिनों का उत्सव अखिल भारतीय विद्वत परिषद के अध्यक्ष डॉ. कामेश्वर उपाध्याय बताते हैं कि हिंदू नववर्ष सिर्फ एक नहीं, बल्कि नौ दिनों का उत्सव है। जो कि राम नवमी तक मनाया जाना चाहिए। क्योंकि चैत्र, श्रीराम का महीना है। इसकी शुरुआत में नवरात्रि के दौरान भगवान राम ने शक्ति आराधना की थी। इस नौ दिवसीय उत्सव पर हर दिन औषधियां खाने की परंपरा है। ताकि सेहतमंद रहें और लंबी उम्र जिएं। इसी के चलते राम नवमी से एक दिन पहले यानी अशोक अष्टमी पर अशोक के पेड़ की आठ नई कलियां खाने की परंपरा है। जो धार्मिक और अच्छी सेहत के नजरिए से खास है।




















