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नवरात्रि का दूसरा दिन-ब्रह्मचारिणी माता, मंगल ग्रह को नियंत्रित करने वाली करती है सबका मंगल

नवरात्रि का दूसरा दिन-ब्रह्मचारिणी माता, मंगल ग्रह को नियंत्रित करने वाली करती है सबका मंगल
सीएन, हरिद्वार।
माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन होती है। देवी के इस रूप को माता पार्वती का अविवाहित रूप माना जाता है। ब्रह्मचारिणी संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ, ब्रह्म के समान आचरण करने वाली है। इन्हें कठोर तपस्या करने के कारण तपश्चारिणी भी कहा जाता है। माता ब्रह्मचारिणी श्वेत वस्त्र में सुशोभित हैं, उनके दाहिने हाथ में जप माला और बाएँ हाथ में कमण्डल है। देवी का स्वरूप अत्यंत तेज़ और ज्योतिर्मय है। साथ ही देवी प्रेेम स्वरूप भी हैं। मान्यताओं के अनुसार देवी पार्वती ने भगवान शिव से विवाह करने की इच्छा व्यक्त की, जिसके बाद उनके माता-पिता उन्हें हतोत्साहित करने की कोशिश करने लगे। हालाँकि इन सबके बावजूद देवी ने कामुक गतिविधियों के स्वामी भगवान कामदेव से मदद की गुहार लगाई। ऐसा कहा जाता है कि कामदेव ने शिव पर कामवासना का तीर छोड़ा और उस तीर ने शिव की ध्यानावस्था में खलल उत्पन्न कर दिया, जिससे भगवान आगबबूला हो गए और उन्होंने स्वयं को जला दिया। कहानी यही ख़त्म नहीं होती है। उसके बाद पार्वती ने शिव की तरह जीना आरंभ कर दिया। देवी पहाड़ पर गईं और वहाँ उन्होंने कई वर्षों तक घोर तपस्या किया जिसके कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम दिया गया। इस कठोर तपस्या से देवी ने भगवान शंकर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इसके बाद भगवान शिव अपना रूप बदलकर पार्वती के पास गए और अपनी बुराई की, लेकिन देवी ने उनकी एक न सुनी। अंत में शिव जी ने उन्हें अपनाया और विवाह किया। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं। देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल पर जल से भरा कलश स्थापित करें। मां ब्रह्मचारिणी की मूर्ति या चित्र को साफ स्थान पर रखें। आंखें बंद कर मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें और उन्हें प्रणाम करें।
मां को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं।
मां को चंदन, कुमकुम और फूल अर्पित करें।  मां को मिश्री, खीर और फल का भोग लगाएं। मां के मंत्र का जाप करें। दीपक जलाकर मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से साधक को संयम, धैर्य और आत्मसंयम की प्राप्ति होती है। यह पूजा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है जो जीवन में संयम, साधना और ज्ञान की ओर अग्रसर होना चाहते हैं। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयों से पार पाने की शक्ति मिलती है। वे साधकों को आत्मज्ञान और सिद्धि प्रदान करती हैं।
मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमरू।।
दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

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