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धर्मक्षेत्र

आज 20 जनवरी 2026 मंगलवार को माघ नवरात्रि का दूसरा दिन, मां तारा देवी को समर्पित

सीएन, हरिद्वार। आज 20 जनवरी 2026 है। आज माघ नवरात्रि का दूसरा दिन है। गुप्त नवरात्रि का आज दूसरा दिन है जो माँ तारा देवी को समर्पित है। माघ नवरात्रि को इसलिए कहा जाता है क्योंकि आजकल लोग तंत्र-साधना करने वाले लोग मां भगवती के दस महाविद्याओं की पूजा को सिद्ध करने के लिए पूजा करते हैं। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ सिद्धांतों की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए विशेष साधना करते हैं। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा और मन में सबसे ज्यादा विश्वास होगा, फल रूपी ही सुख होगा। मान्यता है कि जो भक्त माघ व आषाढ़ नवरात्रि में गुप्त रूप से आदि शक्ति देवी दुर्गा की पूजा करते हैं, उनके जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी, सोमवार को हुई थी और इसका समापन 27 जनवरी को होगा। इन नौ दिनों में होती है मां दुर्गा के 9 अवतारों की आराधना। गुप्त नवरात्री साधनाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण मणियाँ हैं। इसमें शक्तियां प्राप्त की जा सकती हैं।गुप्त नवरात्रि का आज दूसरा दिन है जो माँ तारा देवी को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन अघोरी विशेष रूप से महाविद्या तारा की पूजा करने के लिए की जाती है। महर्षि वैश्य ने सबसे पहले विश्वविद्यालयी पुरातत्व की थी। शत्रुओं का नाश करने वाली माँ तारा सौंदर्य, ऐश्वर्य की देवी रूप में मणियाँ हैं। साथ ही आर्थिक, भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाली भी हैं। तारापीठ में देवी सती के उत्सव मनाए गए। इसलिए इस स्थान को नयनतारा भी कहा जाता है। यह पृथिवी पश्चिम बंगाल के बीरभूम में स्थित है। एक अन्य कथा के अनुसार माना जाता है कि तारा देवी राजा दक्ष की पुत्री के स्थान पर, तारा देवी मंदिर से 13 किलोमीटर दूर शोघी में स्थित है। गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में भी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी के अनुसार गुप्त नवरात्रि में नौ दिन तक कलश स्थापना की जा सकती है। यदि कलश की स्थापना हो तो प्रातः-शाम मंत्र जाप, चालीसा या सप्तशती का पाठ करें। दोनों ही समय आरती करना भी अच्छा होगा। माँ को दोनों का समय भी लगा। माघ गुप्त नवरात्रि में साधकों को आशीर्वाद के साथ कुछ विशेष मंत्रों का भी ध्यान रखना चाहिए, अन्य उद्घोषणा करने से मां भगवती प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को सुख और समृद्धि की पेशकश की जाती है। ऐसे में साधकों को माघ नवरात्रि का शुभारंभ दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए।

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