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नैनीताल

लगातार बारिश से नैनी की सहायक सूखाताल झील पानी से हुई लबालब

लगातार बारिश से नैनी की सहायक सूखाताल झील पानी से हुई लबालब
सीएन, नैनीताल।
नैनी झील में सब सरफेस फ्लो से 40 प्रतिशत पानी देने वाली सूखाताल झील बीते कई वर्षो से बरसात के दौरान सूखी ही नजर आती रही है। सितम्बर से अक्टूबर तक में लबालब रहने वाली सूखाताल छोटे से तालाब के रूप में दिखाई देने से पर्यावरणविद् चिंता जाहिर कर चुके हैं लेकिन इस बार उलट लगातार बारिश से नगर के प्राकृतिक जल स्रोत खुल चुके हैं। जिसके चलते सूखाताल झील पानी से लबालब भर गई है। झील के किनारे पाथ वे भी झील में समा गया है। नगर की सूखाताल झील बरसात के दौरान भर जाती है। जो नैनी झील के सहायक के रूप में कार्य करती है। लेकिन कई कारणों के चलते झील लबालब नहीं भर पाती है। लेकिन इस बरसात नैनीताल में मूसलाधार बारिश होने से झील अपने पुराने स्वरूप में दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों को कहना है कि प्रतिदिन चार से पांच इंच झील का जल स्तर बढ़ रहा है। ऐसा एक दशक पूर्व देखा गया। झील लबालब भरने से एक ओर शहर वासियों में खुशी की लहर है तो वहीं झील का बढ़ता जल स्तर देख वहां रहने वाले लोगों के मन में चिंता बनी हुई है। इस बार अच्छी वर्षा होने के कारण समझा जा रहा था कि पूर्व की भांति डूब क्षेत्र में आये अतिक्रमण वाले भवन जद में आ सकते है। यहां डूब क्षेत्र में रह रहे लोगों में डर बना हुआ था लेकिन यह अब तक निर्मूल साबित हुआ है। बता दें कि नैनी झील में संतोषजनक जलभराव देखा गया। यहां खास बात यह है कि हाई कोर्ट के आदेशों के बाद सूखाताल डूब क्षेत्र में बने भवनों तक पानी भरने की स्थिति में पानी निकासी पर रोक लगा दी गई है। जबकि दो वर्ष पूर्व तक डूब क्षेत्र से प्रशासन राजनैतिक दबाव में आकर पम्पों के माध्यम से पानी निकाल कर नालियों में बहा देता था। बता दें कि नैनी झील 40 प्रतिशत भूमिगत व 60 प्रतिशत वर्षा जल से रिचार्ज होती है। जिसमें से सर्वाधिक रिचार्ज सूखाताल क्षेत्र के जलागम क्षेत्र से होता है। लेकिन सूखाताल क्षेत्र में लगातार अवैध निर्माणों व इस क्षेत्र की भारी उपेक्षा के कारण नैनी झील की हालत खराब होती जा रही है। यूजीसी के भू-वैज्ञानिक प्रो. बहादुर सिंह कोटलिया का मानना है कि यदि जल भराव कर सूखाताल को पुर्नजीवित किया जाता है तो आने वाले वर्षों में नैनी झील को कुछ राहत मिल सकती है।

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