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हसीना ने पूरा किया अपना वादा, दिग्गज संगीतकार एसडी बरमन को किया सम्मानित
हसीना ने पूरा किया अपना वादा, दिग्गज संगीतकार एसडी बरमन को किया सम्मानित
सीएन, नई दिल्ली। दिग्गज संगीतकार एसडी बरमन उर्फ सचिन देव बरमन। जिनके गानों ने पूरे बॉलीवुड के संगीत को ही बदल दिया एक बार फिर सुर्खियों में छाए हैं। दरअसल बांग्लादेश के कुम्मिला जिले में उनका पैतृक घर है जिसे शेख हसीना सरकार एक कल्चरल कॉम्प्लैक्स में बदलने वाली है। शेख हसीना ने बांग्लादेश स्थित एसडी बरमन के घर को कल्चरल कॉम्पलैक्स में बदलने के लिए 1.10 करोड़ टका यानि 86 लाख सैंक्शन किए हैं। देव बरमन जो कि आरडी बरमन के पिता हैं ने 1906 से अपनी जिंदगी के 18 साल दक्षिण चार्था गांव राजबाड़ी कम्मिला में बताए हैं। ये जानकारी एडवोकेट गोलम फारुक ने साझा की जिन्होंने सिंगर की 596 पेजों की किताब एडिट की थी। फारुक एक एडवोकेट के अलावा एक इतिहासकार भी हैं ऐसे में कहते हैं कि सिंगर का म्यूजिकल टैलेंट पिता की देख-रेख में पनपा था। उनके पिता एक सितारवादक थे। देव बरमन ने अपनी पढ़ाई कम्मिला जिला के स्कूल से पूरी की थी और विक्टोरिया सरकारी कॉलेज से 1924 में ग्रेजुएशन पूरी की थी। एसडी बरमन के पिता त्रिपुरा के रॉयल घराने से थे। वो अपनी जागीर का ध्यान रखने के लिए कम्मिला आ गए थे। वो महल जिसमें दिग्गज संगीतकार पैदा हुए उसे 30 नवंबर 2017 में एक संरक्षित स्मारक में बदला गया था। पीएम शेख हसीना ने 2012 में त्रिपुरा यूनिवर्सिटी के उद्घाटन के दौरान डेलीगेशन को आश्वस्त किया था कि वो दिग्गज के घर और कल्चरल एक्टिविटीज को संरक्षित कर रखेंगी।
अस्सी से भी ज़्यादा फिल्मों में संगीत दिया
हिंदी और बांग्ला फिल्मों में सक्रिय सचिन देव बर्मन ऐसे संगीतकार थे जिनके गीतों में लोकधुनों, शास्त्रीय और रवीन्द्र संगीत का स्पर्श था, वहीं वह पाश्चात्य संगीत का भी बेहतरीन मिश्रण करते थे। सचिन देव बर्मन का जन्म 1 अक्टूबर 1906 में हुआ था। प्यार से लोग उन्हें एस डी बर्मन बुलाते थे। उन्होंने अस्सी से भी ज़्यादा फिल्मों में संगीत दिया था। उन्होंने जिन प्रमखु फिल्मों में संगीत दिया उनमें शामिल हैं मिली, अभिमान, ज्वैल थीफ़, गाइड, प्यासा, बंदनी, सुजाता और टैक्सी ड्राइवर।
- बागों में बहार है- यह गाना फिल्म आराधना का है, जिसे आनंद बक्षी ने लिखा है। यह गीत अभिनेता राजेश खन्ना और अभिनेत्री फरीदा जलाल पर फिल्माया गया था। इसे मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ दी थी।
- यह दिल न होता बेचारा, कदम, न होते अवारा– यह गीत फिल्म ज्वेल थीफ का है। जिसे गीतकार मजरुह सुलतानपुरी ने लिखा और किशोर कुमार ने गाया है। यह गीत अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री वेजंतीमाला पर फिल्माया गया है।
- रात अकेली है, बुझ गये दिये- फिल्म ज्वेल थीफ का आशा भोसले द्वारा गाया यह गाना अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री तनुजा पर फिल्माया गया है। इसे गीतकार मजरुह सुलतानपुरी ने लिखा है।
- ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना- यह गीत मशहूर फिल्म बंदिनी का है, जिसे अभिनेत्री नूतन पर फिल्माया गया है। गीतकार शैलेंद्र द्वारा लिखे इस गाने को मुकेश ने अपनी आवाज दी।
- जलते हैं जिसके लिये- 1959 में आई फिल्म सुजाता का यह गाना मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा है, जिसे तलत महमूद ने अपनी जादुई आवाज में गाया है।
- गाता रहे मेरा दिल, तू ही मेरी मंज़िल- फिल्म गाईड के इस गीत को किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज दी। इसे गीतकार शैलेंद्र ने लिखा है।
- .होटों में ऐसी बात में दबाकर चली आई- 1967 में आई फिल्म ज्वेल थीफ के इस गीत को लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज दी। इसके बोल गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे।
- मेरे सपनों की रानी कब आयेगी तू – फिल्म आराधना का यह गीत गीतकार आनंद बक्षी ने लिखा। किशोर कुमार ने इसे अपनी आवाज दी।
- कोरा कागज था मन यह मेरा- लता मंगेशकर और किशोर कुमार की जादूभरी आवाज में गाया गया यह गाना आज भी श्रोताओं के दिलों में बसा है। फिल्म आराधना के इस गाने के बोल गीतकार आनंद बक्षी ने लिखे।
