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कैश कांड : जस्टिस वर्मा के आवास पर सबसे पहले पहुंचे 5 पुलिसकर्मियों ने जमा किए अपने फोन
कैश कांड : जस्टिस वर्मा के आवास पर सबसे पहले पहुंचे 5 पुलिसकर्मियों ने जमा किए अपने फोन
सीएन, नईदिल्ली। सरकारी आवास से बेहिसाब नकदी मिलने के बाद जांच का सामना कर रहे दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लेने के साथ ही उनके मूल न्यायालय इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया है। इस बीच खबर है कि पूरे मामले में जांच में मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंचे 5 पुलिसकर्मियों ने मुख्यालय को अपने फोन सौंप दिए हैं। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के घर पर आग लगने की घटना के दौरान सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वालों में शामिल पांच पुलिसकर्मियों ने अपने फोन दिल्ली पुलिस मुख्यालय को सौंप दिए हैं। इन फोन का इस्तेमाल सीजेआई संजीव खन्ना द्वारा गठित न्यायाधीशों की तीन सदस्यीय समिति द्वारा की जा रही जांच में किया जाएगा। समिति का गठन आग लगने के दौरान कथित तौर पर नकदी मिलने के मद्देनजर किया गया है। सोमवार की सुबह तुगलक रोड थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर समेत पांच पुलिसकर्मियों को दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने अपने दफ़्तर में बुलाया। पता चला है कि अरोड़ा ने उनसे पूछताछ में सहयोग करने और कोई भी जानकारी देने में संकोच न करने को कहा। पांच पुलिसकर्मियों में एसएचओ, एक सब इंस्पेक्टर, दो हेड कांस्टेबल और एक कांस्टेबल शामिल हैं। हेड कांस्टेबल में से एक जांच अधिकारी भी है। 14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के घर पर आग लग गई थी। आग लगने के सूचना पर फायर बिग्रेड पहुंची थी। जहां पर बड़ी मात्रा में कैश मिला था। इसके बाद से ही विवाद शुरू हो गया। जस्टिस वर्मा ने इन आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि यह कैश न तो उनका है और न ही उनके परिवार का है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें फंसाने के लिए यह साजिश रची गई है।
इलाहाबाद बार एसोसिएशन का विरोध प्रदर्शन शुरू
इलाहाबाद बार एसोसिएशन के सचिव विक्रांत पांडेय ने कहा कि उनकी मांग को जब तक माना नहीं जाएगा बेमियादी हड़ताल जारी रहेगी। आज सुबह से हाईकोर्ट के गेट नंबर 3 पर वकील जमा होने लगे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वकीलों की मांग है कि जस्टिस वर्मा का तबादला तुरंत रोका जाए। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव विक्रांत पांडेय ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक उनकी डिमांड पूरी नहीं हो जाती। उनका आरोप है कि एक ऐसे जज को, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैंए इलाहाबाद भेजकर सम्मानित किया जा रहा है। तिवारी ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश को न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और सीबीआई, ईडी और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा जांच की तत्काल अनुमति देनी चाहिए और साथ ही जरूरत पड़ने पर न्यायमूर्ति वर्मा को पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। इससे पूर्व, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद ने प्रधान न्यायाधीश से सरकार से न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश करने की मांग की।
