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उत्तराखण्ड

बिना अनुमति अवैध रूप से मार्ग निर्माण के लिए संरक्षित प्रजाति के 44 पेड़ काट दिए, विभागों को भनक तक नही

सीएन, देहरादून। चकराता वन प्रभाग के रिखनाड रेंज की सीमा से सटे सिविल सोयम के जंगल में बिना अनुमति अवैध रूप से सड़क निर्माण का मामला सामने आया है। मार्ग निर्माण के लिए संरक्षित प्रजाति के 44 पेड़ काट दिए गए। साथ ही 115 वृक्षों को आंशिक नुकसान पहुंचाया गया। मगर वन व राजस्व विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।दिलचस्प बात यह है कि दोनों विभागों को इसका पता तब चला जब मौके पर डेढ़ किमी सड़क बना दी गई। इतना ही नहीं अवैध निर्माण के इस मामले में संदेह के घेरे में आए वन व राजस्व विभाग के अधिकारी जिम्मेदारी से बचने को सीमा विवाद में उलझे रहे। आखिरकार अब वन विभाग की जांच में अवैध निर्माण की पुष्टि होने पर म्यूंडा निवासी दो आरोपितों के विरुद्ध फारेस्ट एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया है। डीएफओ चकराता वैभव कुमार सिंह ने बताया कि अवैध रूप से मार्ग निर्माण सिविल सोयम क्षेत्र में हुआ है जो राजस्व विभाग के अधीन है। वहीं संयुक्त मजिस्ट्रेट डा. हर्षिता सिंह का कहना है कि मार्ग निर्माण आरक्षित वन क्षेत्र की सीमा में होने का पता चला है। ऐसे में वास्तविक स्थिति जानने को अब संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण करेगी। विकासखंड चकराता के प्रमुख पर्यटन स्थल लाखामंडल से जुड़े गोठाड़ के पास से छामरी छानी तक बिना किसी अनुमति के डेढ़ किमी लंबे संपर्क मार्ग का निर्माण कर दिया गया। नियम कानून को ताक पर रख पोकलैंड मशीन से हुए अवैध मार्ग निर्माण की जद में आए वृक्षों का भी सफाया कर दिया गया। वृक्षों का अधिकांश प्रकाष्ट बड़े-बड़े बोल्डर व मिट्टी के मलबे के नीचे दब गए। हालांकि अब रिखनाड रेंज पुनाह के वन बीट अधिकारी रविंद्र सिंह राठौर ने मामले में आरोपित युद्धवीर सिंह व अतर सिंह निवासी म्यूंडा के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 एवं संशोधित अधिनियम 2001 की धाराओं के तहत केस दर्ज कराया है। डीएफओ चकराता वैभव कुमार सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले गोठाड़ के पास से छामरी छानी तक मार्ग निर्माण के मामले में पेड़ों के अवैध पातन की सूचना मिलने पर वन विभाग की रिखनाड रेंज की टीम को मौके पर भेजा गया।जिस स्थान पर सड़क का निर्माण किया गया है, वह सिविल सोयम जंगल के राजस्व विभाग क्षेत्र में आता है। वन विभाग की टीम ने मार्ग निर्माण की जद में आए पेड़ों के अवैध पातन के मामले में दो नामजद आरोपितों के विरुद्ध फारेस्ट एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। इस संबंध में तहसील प्रशासन व राजस्व विभाग को सूचना कर दी गई है। नुकसान की भरपाई आरोपितों से की जाएगी।

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