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उत्तराखण्ड

अंकिता भंडारी हत्याकांड : महापंचायत में उमड़ी भारी भीड़, वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज

सीएन, देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय के लिए फिर से आवाज बुंलद हो गई है। बता दें कि साल 2022 में अंकिता भंडारी की भाजपा नेता के बेटे पुलकित आर्य ने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। उन्होंने एक वीआईपी को स्पेशल सर्विस देने का दबाव अंकिता भंडारी पर डाला था। इनकार करने पर तीनों ने अंकिता भंडारी की हत्या कर उसका शव चीला नहर में ठिकाने लगा दिया था। हालांकि इस मामले में कोर्ट पुलकित सहित उसके दो साथियों को उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। बीते दिनों अभिनेत्री उर्मिला सनावर के सोशल मीडिया में किए गए दावों से राज्य में सियासी भूचाल आ गया था। वीआईपी के नाम के खुलासे को लेकर पूरे राज्य में आंदोलन शुरू हो गए थे। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मामले की जांच की सीबीआई से कराने की संस्तुति कर दी थी। बकायदा सीबीआई ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है। लेकिन फिर भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। इसे लेकर आज देहरादून के परेड ग्राउंड में महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में अंकिता के माता-पिता, पूर्व सीएम हरीश रावत, सपा के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान सहित तमाम संगठनों ने भाग लिया। महापंचायत में भारी भीड़ रही।अंकिता भंडारी हत्याकांड न्याय यात्रा के तहत आज परेड ग्राउंड में हुई महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि जब तक वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो जाती तब तक आंदोलन चलता रहेगा।  वक्ताओं ने कहा कि सीएम  पुष्कर धामी अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच पर्यावरणविद की एफआईआर को आधार बनाकर करवा रहे हैं। कहा कि सीबीआई जांच उस व्यक्ति की तहरीर पर नहीं बल्कि अंकिता के माता-पिता की तहरीर के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।  उन्होंने कहा जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाये, उनको भी सीबीआई जांच के दायरे में लाया जाए। कहा कि जिन्होंने वसंत विहार थाने में अंकिता केस मे तहरीर दी है, उनका कोई संबंध अंकिता के परिवार से नहीं है। न वह किसी आंदोलन में नजर आए।  लिहाजा उनकी भी जांच होनी चाहिए। महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि अंकिता हत्याकांड में सजायाफ्ता लोगों के केस के तहत अग्रिम जांच होनी चाहिए।  भाकपा माले के सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण में सरकार ने सड़कों के आंदोलनों के दबाव में सीबीआई जांच कराये जाने की घोषणा की। यह भी प्रश्न है कि अंकिता के माता-पिता और तमाम आंदोलनकारी पहले दिन से ही इस मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाते आ रहे थे, लेकिन सरकार हीलाहवाली करती रही।  उन्होंने कहा अब 3 साल बाद विलंबित जांच हो रही है। कहा कि अंकिता हत्याकांड की जांच सीबीआई से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई  जाए।

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