उत्तराखण्ड
उत्तराखंड में अब बाहरी राज्यों के शातिर अपराधी हावी, तो यह सरकार का फेल्योर, बाहरी व स्थानीय संघर्ष की भी शुरुआत
सीएन, नैनीताल/पौड़ी। उत्तराखंड की शांत व सुरक्षित मानी जाने वाली देवभूमि में अब बाहरी राज्यों के शातिर अपराधी नए-नए हथकंडों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। बाहरी लोगों ने यहां की डेमोग्राफी तो बदली ही है साथ ही यहां की जमीनों व संसाधनों पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया है। बाहरी अपराधी सरेआम अपराध करने में नही झिझक रहे हैं। यहां आने वाले अधिकांश सैलानी सड़कों, सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों मेें हुड़दंग व स्थानीय लोगों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। मारपीट की यह घटनाएं बाहरी व स्थानीय संघर्ष की शुरुआत तो नही? अगर ऐसा है तो यह सरकार का फेल्योर ही माना जायेगा। लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं को देखते हुए राज्य की पुलिस व प्रशासन पर भी प्रश्नचिन्ह लगता है। बाहरी प्रदेशों से यहां आ चुके अपराधियों द्वारा कभी रेस्टोरेंट संचालकों को बदनाम करने की धमकी देकर वसूली की जा रही है, तो कहीं ‘हनी ट्रैप’ के जरिए लोगों को ब्लैकमेल कर मोटी रकम ऐंठी जा रही है। पौड़ी गढ़वाल पुलिस ने ऐसे ही दो संगठित गिरोहों का पर्दाफाश कर यह साफ संदेश दिया है कि प्रदेश में अपराध करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। श्रीनगर क्षेत्र में एक संगठित गिरोह ने बेहद सुनियोजित तरीके से रेस्टोरेंट संचालक को अपना शिकार बनाया। आरोपियों ने पहले रेस्टोरेंट में खाना खाया और फिर खाने में कॉकरोच मिलने का आरोप लगाकर वीडियो बना लिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर वायरल करने और खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत कर भारी जुर्माना लगवाने की धमकी दी गई। गिरोह ने फर्जी नोटिस भेजकर रेस्टोरेंट की साख खराब करने का दबाव बनाया और 2.5 लाख रुपये की मांग की। लगातार मानसिक दबाव के चलते पीड़ित परिवार को पहली किश्त के रूप में 50 हजार रुपये भी ट्रांसफर करने पड़े। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंक डिटेल्स के आधार पर जांच आगे बढ़ाई और हरियाणा के झज्जर से मुख्य आरोपी अक्षत आनंद उर्फ साहिल समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी सामने आया कि पूरी साजिश पहले से रची गई थी। दूसरे मामले में कोटद्वार क्षेत्र में एक अलग ही तरह का संगठित अपराध सामने आया। यहां एक युवती और उसका साथी मिलकर लोगों को प्रेम जाल में फंसाते थे। युवती पहले लिफ्ट मांगकर या बातचीत के जरिए लोगों से नजदीकियां बढ़ाती, फिर उन्हें होटल या कमरे में ले जाती थी। पहले से तय प्लान के तहत उसका साथी वहां पहुंचकर आपत्तिजनक वीडियो बना लेता और फिर उसे वायरल करने या झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर मोटी रकम वसूलता था। पुलिस के अनुसार इस गिरोह ने अब तक दर्जनों लोगों को अपना शिकार बनाया है। कोटद्वार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जो उत्तर प्रदेश के बिजनौर के निवासी बताए जा रहे हैं। दोनों मामलों में पौड़ी पुलिस की त्वरित और सटीक कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड में बाहरी अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। पुलिस अब इन गिरोहों के अन्य सदस्यों और संभावित नेटवर्क की भी जांच कर रही है।देवभूमि में बढ़ती इस तरह की आपराधिक घटनाएं चिंता का विषय हैं, जहां बाहरी गिरोह स्थानीय लोगों और व्यापारियों को निशाना बना रहे हैं। यह तमाम घटनाएं उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रही हैं। यह भी सच है कि राजनैतिक बरदहस्त प्राप्त गुंडागर्दी सबसे अधिक हो चुकी है। ऐसे मामलों को सरकारी तंत्र छुपा देता है। अगर ऐसा चलता रहा तो शांत पहाड़ों को धधकने से कोई नही रोक सकता है।









































