उत्तराखण्ड
साक्षात शुभ्र हिमालय के दर्शन कराता बागेश्वर का मनोरम लीती गांव
साफ-सुथरे होमस्टे और स्वादिष्ट जैविक भोजन कम दरों में उपलब्ध
सीएन, लीती (बागेश्वर)। जनपद बागेश्वर के विकासखंड कपकोट के अंतर्गत ग्राम लीती बहुत ही सुंदर एवं सुरम्य स्थान है। बागेश्वर से लीती की दूरी लगभग 60 किलोमीटर तथा कपकोट से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लीती गांव हिमालय दर्शन के लिए बहुत ही उपयुक्त स्थान है। यहां पर रहने के लिए साफ-सुथरे होमस्टे सस्ती दरों पर उपलब्ध है। लीती गांव से लगभग 15 किलोमीटर सड़क मार्ग द्वारा आगे बढ़ने पर गोगीना इस मार्ग का सड़क का अंतिम छोर है। गोगीना नामक स्थान से नामिक एवम हीरामणि ग्लेशियर के अद्भुत दर्शन होते हैं। नामिक पिथौरागढ़ जनपद के अंतिम गाँव है। जहाँ पहुचना अत्यंत ही दुष्कर है। वर्तमान में नामिक गांव के लिए सड़क निर्माण का कार्य प्रगति पर है। नामिक गांव में वर्तमान समय में मोबाइल नेटवर्क हेतु एक टावर स्थापित हो चुका है। जिसका बहुत जल्दी कार्य करने की आशा है। बर्तमान में यहाँ पर मोबाइल नेटवर्क कुछ स्थानों पर कभी कभी आता है। स्कूल के बच्चों द्वारा नेटवर्क के स्थान चिन्हित कर वहाँ मोबाइल चलाते देखा जा सकता है। अधिकतर लोग मोबाइल नेटवर्क के लिए शामा की ओर आकर ही मायावी डिजिटल दुनियां से जुड़ते है। गोगीना से आगे किमु बागेश्वर जनपद का अंतिम गांव है। गोगीना अंतिम मोटर हेड है। यहाँ से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है कीमु। किमु पहुँच कर हिमालय के अप्रितम सौंदर्य को देखकर कोई भी कुछ समय के लिए सांसारिक माया मोह से विरक्त हो सकता है। किमु जाने के लिए लगभग 3.5 किलोमीटर की चढाई पार करनी पड़ती है, जिसमे लगभग 500 मीटर की अत्यंत दुरूह एवम संकरे मार्ग की खड़ी चढ़ाई तथा बगल में गहरी खाई दिन में तारों के दर्शन करा देती है। शेष 3 किलोमीटर की चढ़ाई भी कठिन है लेकिन खतरनाक नही है। किमु गांव की चढ़ाई खत्म होते ही लाटू देवता का मंदिर आता है जहां से हिमालय के विहंगम दृश्य देख कर यात्री अपने आप को ही भूल जाता है। किमु गांव के लोग बहुत सीधे-साधे और भोले हैं। यहां पर भी रुकने के लिए होमस्टे और स्वादिष्ट जैविक भोजन काफी कम दरों में उपलब्ध हो जाता है। यहां के लोग रिंगाल की चटाई एवं अन्य वस्तुएं बना कर स्वरोजगार करते हैं ।हिमालय दर्शन करने के उपरांत इस स्थान से वापस आने का मन हीं नही होता है। वर्तमान में गोगीना से किमु तक सड़क निर्माण का कार्य प्रगति पर है। लीती जाने के लिए भराड़ी होते हुए भनार गांव को जाने वाली सड़क से शामा तक पहुंचना पड़ता है। शामा से लीती मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यदि आप प्रकृति से प्रेम रखते हैं तो यकीन मानिए आपको लीती छोड़ने का मन नहीं करेगा।
