उत्तराखण्ड
उत्तराखंड: फायर वॉचर्स को 10 लाख का बीमा, केंद्र से मांगी 4 अरब की मदद, समितियों को 30 हजार रुपये का इंसेंटिव
उत्तराखंड: फायर वॉचर्स को 10 लाख का बीमा, केंद्र से मांगी 4 अरब की मदद, समितियों को 30 हजार रुपये का इंसेंटिव
सीएन, देहरादून। राज्य में जंगल की आग से प्रमुख भूमिका निभाने वाले किरदार फायर वॉचर्स का बीमा अब 10 लाख तक होगा। वन विभाग ने पहले यह राशि 5 लाख तय की थी, लेकिन अब इसमें बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही वनाग्नि के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले फायर वॉचर का दस लाख का इंश्योरेंस होगा। इसके अलावा वनाग्नि नियंत्रण के लिए राज्य ने पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से चार अरब की मदद मांगी है, इसका प्रोजेक्ट भी भेजा गया है। इस पर मंत्रालय में 18 मार्च को बैठक रखी गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वन विभाग हर साल फायर सीजन में औसत 4500 फायर वॉचर्स की तैनाती करता है जो जंगल में आग पर बुझाने में अहम भूमिका निभाते हैं। पिछले साल राज्य के जंगलों में भीषण आग लग गई थी जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। इस स्थिति से सबक लेते हुए सरकार ने फायर वॉचर्स की संख्या में वृद्धि की है। वनाग्नि नियंत्रण के लिए अधिक धन की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। अब मंत्रालय की बैठक के बाद इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। राज्य को उम्मीद है कि इस बार केंद्र सरकार से जल्द मंजूरी मिल सकती है, जिससे जंगल की सुरक्षा और वन नियंत्रण के उपाय उपलब्ध होंगे। मालूम हो कि उत्तराखंड एक वन बाहुल्य राज्य है। जहां का करीब 71 फीसदी हिस्सा जंगलों से घिरा हुआ है लेकिन प्रदेश के जंगलों में हर साल हो रही वनाग्नि की घटनाएं एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। क्योंकि वनाग्नि की वजह से हर साल वन संपत्ति और जानमाल को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में वन विभाग वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम के लिए जन सहभागिता पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत क्लस्टर स्तर पर वनाग्नि ग्राम पंचायत स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समितियों का गठन किया जाएगा। जिसमें ग्राम प्रधान, वन पंचायत सरपंच, महिला व युवक मंगल दलों के प्रतिनिधि और वन विभाग, राजस्व विभाग के कार्मिकों को शामिल होंगे, इसके तहत समितियों को 30 हजार रुपये का इंसेंटिव भी दी जाएगी।
