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देश में गर्मी का पारा तीन-चार दिन में 5 डिग्री बढ़ने वाला है, जलवायु परिवर्तन के कारण सर्वाधिक प्रभाव हिमालय पर पड़ेगा

देश में गर्मी का पारा तीन-चार दिन में 5 डिग्री बढ़ने वाला है, जलवायु परिवर्तन के कारण सर्वाधिक प्रभाव हिमालय पर पड़ेगा
सीएन, नई दिल्ली।
दिल्ली-एनसीआर के साथ ही देश के कई हिस्सों में पारा लगातार बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग ने रविवार को अगले तीन से चार दिनों के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि की भविष्यवाणी की है। हालांकि, उत्तर.पश्चिम भारत के कई स्थानों पर अगले चार दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है। मौसम विभाग ने कहा कि अगले चार से पांच दिनों के दौरान मध्य भारत और आंतरिक महाराष्ट्र में अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि होने की संभावना है। इसके अलावा गुजरात के लिए, मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 2.3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया है। हालांकि, उसके बाद लगभग 2.3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट का अनुमान भी लगाया है। इसने 25 मार्च तक गुजरात के तटीय क्षेत्रों में अलग-अलग इलाकों में गर्म और आर्द्र मौसम की स्थिति को भी रेखांकित किया। क्लाइमेट ट्रेंड्स के विश्लेषण के मुताबिक 1 जनवरी से 29 फरवरी 2024 के बीच पूरे देश में कुल मिलाकर 33 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सर्दियों के मौसम में सामान्य तौर पर 39.8 मिलीमीटर बारिश होती है लेकिन इस बार सिर्फ 26.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती हुई ग्लोबल वार्मिंग मौसम का पैटर्न बदल रही है, जिससे तापमान और बारिश के तरीकों में भी असमानताएं पैदा हो रही हैं। भारत के मौसम के लिहाज से बेहद अहम माना जाने वाला पश्चिमी विक्षोभ इस साल ज्यादातर ऊपरी अक्षांश वाले क्षेत्रों में ही सीमित रहा जिससे पश्चिमी हिमालय में इसका प्रभाव कम रहा। पश्चिमी विक्षोभ सर्दी का मौसम लाने और उत्तर-पश्चिम भारत व मध्य भारत के क्षेत्रों में मौसम गतिविधियों को सक्रिय करने के लिए जाना जाता है। इस वर्ष सर्दी में पश्चिमी विक्षोभों की तीव्रता और बारंबारता कम रही है। क्लाइमेट ट्रेंड्स के मुताबिक दिसंबर माह में अधिक तापमान के साथ शुरू हुआ। बारिश और बर्फबारी भी नहीं हुई। इस कारण पूरे उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों और पहाड़ी राज्यों में सर्दी का मौसम देरी से आया। यहां 18.9 मिलीमीटर के सामान्य औसत की तुलना में इस महीने 6.6 मिमी मीटर बारिश ही दर्ज की गई, जिसके परिणामस्वरूप बारिश में 65 प्रतिशत की कमी आई। फरवरी में जनवरी की तुलना में फरवरी की शुरुआत अच्छी रही और इस दौरान अधिक पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी क्षेत्रों और मैदानी इलाकों में बारिश और बर्फबारी हुई। कुल मिलाकर इस महीने आठ पश्चिमी विक्षोभ आए, जिनमें से छह सक्रिय रहे। इससे 31 जनवरी तक 58 प्रतिशत रही बारिश की कमी को कम करने में मदद मिली जो 29 फरवरी को घटकर 33 प्रतिशत रह गई। 

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