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शहीद दिवस : महात्मा गांधी पर कई बार हुए हमले, पर आज के दिन हो गए शहीद.. हे राम….

सीएन, नैनीताल। भारत सहित विश्व भर में गांधी एक ऐसा नाम है जिन्हें आज भी शिद्दत से याद किया जाता है। उनके आदर्शों में चलने का संकल्प लिया जाता है। हर साल 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है। यह दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के लिए जाना जाता है, जिनकी 1948 में हत्या कर दी गई थी। इस दिन उन्हें उनके बलिदान के लिए याद किया जाता है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते होंगे कि गांधीजी को हत्या से पहले भी कई हमलों का सामना करना पड़ा था। 25 जून 1934 को पूना में अपनी हरिजन यात्रा के दौरान,  महात्मा गांधी पर पहली बार जानलेवा हमला हुआ था। गांधी विरोधी चरमपंथियों ने उन पर एक हैंड ग्रेनेड फेंका था, जो अधिकारों और सामाजिक सुधार के लिए उनके काम का विरोध कर रहे थे। ग्रेनेड गांधी को नहीं लगा, जिससे कुछ अधिकारियों को मामूली चोटें आईं। हमले के बाद भी गांधी ने अपना कार्यक्रम जारी रखा था। जुलाई 1944 में पंचगनी में महात्मा गांधी पर दूसरी बार जानलेवा हमला हुआ था। गांधी शांत रहे और उन्होंने गोडसे को बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन उसने मना कर दिया। इस हमले ने चरमपंथी समूहों से बढ़ते खतरे को उजागर किया था। इन हमलों के इतिहास को समझना न केवल उन चुनौतियों को समझना है जिनका सामना गांधी जी ने किया था बल्कि उनके जीवन का उद्देश्य और साहस भी जानना है। महात्मा गांधी पर 5 से ज्यादा हमले हुए थे। उनका मानना था कि जब मैं किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता तो जान लेने की इतनी कोशिशें क्यों हुईं। गांधीजी पर दक्षिण अफ्रीका में कई बार हमला हुआ था। वहां कई बार उनकी जान लेने की कोशिश की गई और उन्हें धमकियां मिली थीं। सितंबर 1944 में सेवाग्राम में महात्मा गांधी पर जिन्ना से मिलने की तैयारी करते समय तीसरी बार जानलेवा हमला हुआ था। नाथूराम गोडसे और एलजी थत्ते ने चाकू दिखाकर उन्हें रोकने की कोशिश की थी। उन्हें शहादत की धमकियां भी दी गई थीं। 29 जून 1946 को महात्मा गांधी पुणे जा रहे थे। इस दौरान उन पर चौथी बार हमला हुआ था। हमलावरों ने गांधी स्पेशल ट्रेन को पटरी से उतारने के लिए पटरियों पर पत्थर रखे थे लेकिन ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर हादसा बचाया। गांधी को इस घटना का पता नहीं चला, वह सोते रहे। हालांकि कुछ लोगों ने दावा किया कि यह लुटेरों का काम था, लेकिन रेलवे रिकॉर्ड से पता चला कि यह जानबूझकर की गई तोड़फोड़ थी। बिरला हाउस में शाम की प्रार्थना सभा के दौरान गांधी के कुछ मीटर पीछे एक बम फटा और इसके लिए मदनलाल पाहवा को गिरफ्तार किया गया था। कई हमलों और चेतावनी के बाद भी गांधीजी अडिग रहे थे। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वह हे राम कह कर शहीद हो गये। भारत ही नही पूरा विश्व स्तब्ध रह गया।

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