अंतरराष्ट्रीय
आज 8 मार्च को है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : महिलाओं की उपलब्धियों को सलाम करने का दिन
सीएन, दिल्ली। आज 8 मार्च का दिन दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों को सलाम करने का दिन है। इस दिन को महिलाओं की आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक तमाम उपलब्धियों के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। साथ ही उन्हें यह एहसास कराया जाता है कि वह हमारे लिए कितनी खास हैं। आज एक महिला केवल एक बेटी, मां या पत्नी नहीं होती, वह समाज की रीढ़ की हड्डी होती है। आज की महिलाएं अंतरिक्ष से लेकर खेल के मैदान तक और घर की चौखट से लेकर व्यापार की दुनिया तक, हर जगह अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की जड़ें बीसवीं सदी की शुरुआत में उत्तरी अमेरिका और यूरोप के श्रमिक आंदोलनों से जुड़ी हैं। इसे 1977 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई। 8 मार्च की यह तारीख विशेष रूप से वर्ष 1917 से संबंधित है, जब रूस की महिलाओं ने ‘रोटी और शांति’ की मांग को लेकर ऐतिहासिक हड़ताल शुरू की थी। यह आंदोलन तत्कालीन जूलियन कैलेंडर के अनुसार 23 फरवरी को शुरू हुआ था, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से 8 मार्च बैठता है। आज, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस दुनिया के अनेक देशों में मनाया जाता है। यह दिन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देने का अवसर है। साथ ही, यह एक ऐसे वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है, जहाँ से महिला अधिकारों और उनकी समान भागीदारी के लिए दुनिया भर के समर्थन को और अधिक सशक्त बनाया जाता है। वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम “अधिकार और न्याय के साथ-साथ हर महिला और बालिका के सशक्तिकरण के लिए वास्तविक कार्रवाई” पर केंद्रित है। दुनिया भर में गिव टू गेन अभियान जेंडर इक्वालिटी के लिए आपसी सहयोग और उदारता के महत्व पर जोर देता है। यह थीम केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प है। यह याद दिलाती है कि अब वक्त प्रतीकों से ऊपर उठकर महिलाओं के अधिकारों को सशक्त बनाने और न्याय को उनकी पहुँच में लाने का है। पूरे संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक स्तर पर कार्यक्रम और चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं। यूरोप में डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय कार्यालय के जरिए भी ऐसे प्रयास हो रहे हैं, जहां नीति निर्माता, विशेषज्ञों और नागरिक समाज के लोग मिलकर महिलाओं के अधिकारों और उनकी हिस्सेदारी को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर काम कर रहे हैं।

























