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शारदीय नवरात्रि में जरूर करें साफ-सफाई, माता रानी करेंगी हर मनोकामना पूर्ण

शारदीय नवरात्रि में जरूर करें साफ-सफाई, माता रानी करेंगी हर मनोकामना पूर्ण
सीएन, हरिद्वार।
हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने वाली है। सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का बहुत ही अधिक महत्व होता है। नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 रूपों की आराधना की जाती है। पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष के आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है। इस साल 15 अक्टूबर दिन रविवार से नवरात्रि की शुरुआत हो गई हैं। ऐसे में जातकों को कुछ कार्य करना बेहद ही जरूरी होता है। यदि आप भी माता रानी की कृपा पाना चाहते हैं तो ऐसे कार्यों को जरूर करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान अपने घरों की साफ.सफाई का विशेष ध्यान रखें। ऐसी मान्यता है कि घर साफ रहने से माता दुर्गा का आगमन होता है। इसके साथ ही शुभ फल की प्राप्ति भी होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर कुमकुम और हल्दी से मां दुर्गा के पद्य चिह्न अवश्य बनाएं। ऐसा करने से माता प्रसन्न होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए सुबह-शाम आरती जरूर करनी चाहिए। ऐसा करने में माता रानी की कृपा हमेशा आप पर बनी रहेगी। ऐसी मान्यता है कि माता रानी को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाने से परिवार पर मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है। इसके साथ ही शुभ फल की प्राप्ति भी होती है। नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए अखंड ज्योत जलानी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि अखंड ज्योत जलाने से सारी मनोकामना पूर्ण हो जाते हैं। इसके साथ ही माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
नवरात्रि के नौ दिन और देवी दुर्गा के रूप
नवरात्रि एक ऐसा त्योहार है जो लोगों को आध्यात्मिक रूप से जागृत करने और उन्हें देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। यह त्योहार लोगों को जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए भी प्रेरित करता है। नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा करने का महत्वः
शैलपुत्री: शैलपुत्री देवी दुर्गा का पहला रूप हैं। वे हिमालय की पुत्री हैं और उनके हाथों में तलवार और कमल का फूल है। शैलपुत्री देवी दुर्गा की शक्ति और दया का प्रतीक हैं।
ब्रह्चारिणी: ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा का दूसरा रूप हैं। वे एक तपस्वी हैं और उनके हाथों में कमंडल और जपमाला है। ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा की आध्यात्मिकता और ज्ञान का प्रतीक हैं।
चंद्रघंटा: चंद्रघंटा देवी दुर्गा का तीसरा रूप हैं। उनके माथे पर एक अर्धचंद्र है और उनके हाथों में त्रिशूल और खड्ग है। चंद्रघंटा देवी दुर्गा की रक्षा और सुरक्षा का प्रतीक हैं।
कुष्मांडा: कुष्मांडा देवी दुर्गा का चौथा रूप हैं। वे ब्रह्मांड की उत्पत्ति का प्रतीक हैं। कुष्मांडा देवी दुर्गा की शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक हैं।
स्कंदमाता: स्कंदमाता देवी दुर्गा का पांचवां रूप हैं। वे भगवान कार्तिकेय की माता हैं। स्कंदमाता देवी दुर्गा की मातृत्व और करुणा का प्रतीक हैं।
कात्यायनी: कात्यायनी देवी दुर्गा का छठा रूप हैं। वे भगवान शिव की पत्नी हैं। कात्यायनी देवी दुर्गा की शक्ति और साहस का प्रतीक हैं।
कालरात्रि: कालरात्रि देवी दुर्गा का सातवां रूप हैं। वे अपने भयंकर रूप के लिए जानी जाती हैं। कालरात्रि देवी दुर्गा की बुराई पर विजय का प्रतीक हैं।
महागौरी: महागौरी देवी दुर्गा का आठवां रूप हैं। वे एक सफेद रंग की देवी हैं। महागौरी देवी दुर्गा की पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक हैं।
सिद्धिदात्री: सिद्धिदात्री देवी दुर्गा का नौवां और अंतिम रूप हैं। उनके हाथों में कमल और त्रिशूल है। सिद्धिदात्री देवी दुर्गा की सिद्धि और ज्ञान का प्रतीक हैं।

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