आपदा
भूकंप : म्यांमार और थाईलैंड में अब तक 700 मरे, मृतकों की संख्या 10 हजार कर सकती है पार
भूकंप : म्यांमार और थाईलैंड में अब तक 700 हो गई, मृतकों की संख्या 10 हजार कर सकती है पार
सीएन, नईदिल्ली। म्यांमार और पड़ोसी देश थाईलैंड में शुक्रवार आए शक्तिशाली भूकंप में मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। म्यांमार में शुक्रवार को आए भूकंप ने तबाही मचा दी। इस वजह से अब तक करीब 700 लोगों की मौत हो चुकी है और यह आंकड़ा बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों को मिलकर 694 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अमेरिकी भूगर्भ एजेंसी ने 10 हजार से ज्यादा मौतों की आशंका जताई है। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक म्यांमार के अधिकारियों ने बताया है कि विनाशकारी भूकंप में मरने वालों की संख्या शनिवार सुबह बढ़कर 694 हो गई है, जबकि 1670 लोग घायल हुए हैं। हालांकि बैंकॉक के अधिकारियों ने शुक्रवार को थाईलैंड में आए भूकंप में मरने वालों की संख्या अब कम बताई है। थाईलैंड ने मरने वालों की संख्या को लेकर अपडेट रिपोर्ट दी है, जिसमें 6 लोगों की मौत की रिपोर्ट दी गई है। वहीं 22 लोगों को घायल और 101 लोगों को लापता बताया गया है। इससे पहले शुक्रवार को मरने वालों का आंकड़ा 10 था। हालांकि थाईलैंड की राजधानी को आपदा क्षेत्र घोषित किया गया है। जबकि म्यांमार की तानाशाह सेना ने भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में आपातकाल लागू कर दिया है। म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने देश की सरकारी टेलीविजन पर कहा है कि उन्होंने किसी भी देश को मदद और दान देने के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा उन्होंने भी आशंका जताई है कि भूकंप की वजह से भारी संख्या में लोगों की जान गई होगी। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने बताया कि भूकंप की गहराई 10 किमी थी। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने आज सुबह अपनी ताजा रिपोर्ट में 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत की आशंका जताई है। भूकंप को लेकर चश्मदीदों ने बताया है कि अचानक इमारतें जोर.जोर से हिलने लगी और अफरा-तफरी मच गई। हजारों लोग सड़क पर आ गये। सभी लोग बदहवास थे। बैंकॉक में लोग अपने अपने दफ्तरों, घरों और मॉल से बाहर निकल आए। छतों पर बने पुल से पानी बह रहा था और लोग बुरी तरह से डरे हुए थे। उस वक्त भूकंप के झटके लगातार आ रहे थे। बैंकॉक में रहने वाली सिरिन्या नकुता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि वो अपने बच्चों के साथ अपने अपार्टमेंट में थीं। उन्होंने कहा पहले तेज झटका आया फिर जमीन बुरी तरह हिलने लगी। मैंने सीढ़ियों से चीजों के गिरने की तेज आवाजें सुनीं। ऐसा लगा कि हम पर पत्थर बरस रहे हैं। मैंने अपने बच्चों को जल्दी से निकलने को कहा और हम ऊपर से तेजी से दौड़कर बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर म्यांमार के मांडले से कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें टूटे घर और टूटी इमारतें देखी जा सकती हैं। म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध के कारण मौतों का असली आंकड़ा शायद पूरी तरह से कभी सामने नहीं आ पाए। इसके अलावा गृहयुद्ध ने राहत.बचाव कार्यों को और भी मुश्किल बना दिया है। अब तक करीब 700 लोगों की मौत हो गई है। देश की सेना ने जानकारी देते हुए बताया कि मरने वालों का आंकड़ा 694 पहुंच गया है और इसके बढ़ने की आशंका बनी हुई है। थाईलैंड में भी भूकंप की वजह से लोगों की मौत हुई है। म्यांमार और थाईलैंड दोनों में मरने वालों का आंकड़ा 700 पार हो गया है। इसके अलावा बीबीसी की रिपोर्ट में जेल अधिकारियों के एक करीबी सूत्र के बताया है कि म्यांमार की जेल में बंद नेता आंग सान सू पूरी तरह से सुरक्षित हैं। भूकंप का उनपर कोई असर नहीं पड़ा है और वे राजधानी नेपीडा की जेल में ही हैं। आपको बता दें कि 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से आंग सान सू को गिरफ्तार कर लिया गया था और अलग अलग मामलों में उन्हें 50 सालों से ज्यादा की जेल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा चीन ने कहा है कि उसने 37 लोगों की एक आपदा प्रतिक्रिया टीम को म्यांमार में राहत और बचाव कार्य में सहायता करने के लिए म्यांमार में भेज दिया है।
भूकंप कैसे आता है, तीव्रता से तबाही का क्या है रिश्ता
भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है, जो पृथ्वी की सतह के नीचे प्लेटों की हलचल से उत्पन्न होती है। जब ये प्लेटें एक.दूसरे से टकराती या खिसकती हैं तो असामान्य रूप से एनर्जी रिलीज होती है जिसके वजह से पृथ्वी के अंदर काफी हलचल होती है और यहां भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है। यह स्केल भूकंप की शक्ति को 0 से 10 के बीच मापता है। हालांकि, पृथ्वी पर 10 रिक्टर स्केल से भूकंप आना असंभव माना जाता है। वर्तमान में कोई वैज्ञानिक पद्धति नहीं है जिससे यह सटीक रूप से बताया जा सके कि कब और कहां भूकंप आएगा। हालांकि यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे जैसी संस्थाएं ऐतिहासिक आंकड़ों और भूवैज्ञानिक स्थितियों के आधार पर संभावित भूकंप क्षेत्रों की भविष्यवाणी कर सकती हैं। भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है लेकिन जागरूकता और सही तैयारी से इसके नुकसान को कम किया जा सकता है।
