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उत्तर प्रदेश

लुलु मॉल विवाद पर सीएम आदित्यनाथ योगी ने दिखाई सख्ती

प्रदर्शनकारियों को बदमाश करार देते हुए सीएम का प्रशासन को सख्ती से निपटने के निर्देश
सीएन, लखनऊ।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बीते दिनों खुले लुलु मॉल के भीतर नमाज पढ़ने को लेकर हुए विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त प्रतिक्रिया आई है। लुलु मॉल विवाद पर प्रदर्शनकारियों को सख्त संदेश देते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग अनावश्यक टिप्पणी कर रहे हैं और लोगों की आवाजाही बाधित करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। लुलु मॉल में प्रदर्शन करने वालों को बदमाश करार देते हुए सीएम योगी ने लखनऊ प्रशासन को सख्ती से निपटने के निर्देश दिए। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, लुलु मॉल विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग अनावश्यक टिप्पणी कर रहे हैं और लोगों की आवाजाही में बाधा डालने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। लखनऊ प्रशासन को इस मामले को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए और इस तरह का उपद्रव पैदा करने की कोशिश करने वाले बदमाशों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। गौरतलब है कि कि लखनऊ के लुलु मॉल को यूपी का सबसे बड़ा शॉपिंग मॉल कहा जा रहा है। जब से इस मॉल की शुरुआत हुई, तब से ही यह लुलु मॉल चर्चा में है। बता दें कि अबू धाबी मुख्यालय स्थित लुलु समूह की एक शाखा लखनऊ के शहीद पथ पर शुरू की गई, जिसका उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। लुलु समूह का नेतृत्व भारतीय मूल के कारोबारी युसूफ अली एमए करते हैं। इस बीच, लुलु मॉल परिसर के अंदर नमाज पढ़ने के मामले को लेकर विवाद के बीच मॉल प्रशासन ने सफाई दी है। केवल मुस्लिमों को ही नौकरी देने के आरोप पर सफाई देते हुए लुलु मॉल प्रशासन ने एक बयान में कहा है कि उसके 80 प्रतिशत कर्मचारी हिंदू हैं। मॉल प्रशासन की ओर से यह स्पष्टीकरण उन आरोपों के बाद आया है, जिसमें कहा गया कि मॉल अपनी रोजगार नीति में पक्षपाती है और मुसलमानों को तरजीह देता है। लुलु मॉल के क्षेत्रीय निदेशक जयकुमार गंगाधर ने बयान जारी कर कहा कि प्रतिष्ठान में किसी को भी धार्मिक गतिविधि संचालित करने की छूट नहीं है। लुलु मॉल लखनऊ प्रशासन ने मुस्लिम पूर्वाग्रह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से प्रोफेशनल प्रतिष्ठान है, जो बिना किसी भेदभाव के व्यापार करता है। बयान में कहा गया कि हमारे कर्मचारियों को कौशल और योग्यता के आधार पर काम पर रखा जाता है, न कि जाति, वर्ग या धर्म के आधार पर। बता दें कि मॉल की मूल कंपनी लुलु ग्रुप इंटरनेशनल का मुख्यालय अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात में है। बयान में कहा गया कि यह दुखद है कि कुछ स्वार्थी तत्व हमारे प्रतिष्ठान को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बयान में आगे स्पष्ट किया गया है कि उनके कर्मचारियों में 80 प्रतिशत हिंदू हैं और बाकी मुस्लिम, ईसाई और विभिन्न अन्य समुदायों से हैं। बयान में कहा गया है कि मॉल प्रशासन ने एक प्राथमिकी दर्ज कराई है और उन लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की, जिन्होंने पब्लिक प्लेस में नमाज पढ़ी। पुलिस ने कहा कि दो लोगों को हाल ही में शनिवार को लुलु मॉल में प्रवेश करने और हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद गिरफ्तार किया गया था। शॉपिंग मॉल में घुसने की कोशिश के दौरान हंगामा करने पर कम से कम 15 अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया। मॉल के एक प्रतिनिधि की शिकायत के आधार पर पुलिस ने गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें यह दावा किया गया कि वीडियो में नमाज पढ़ते दिखने वाले लोग उनके स्टाफ के सदस्य नहीं हैं. सोशल मीडिया पर मॉल में नमाज अदा करने वालों के एक समूह का वीडियो सामने आने के बाद हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) गोपाल कृष्ण चौधरी बताया था कि तहरीर के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर किया गया कार्य) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। मॉल प्रशासन ने शुक्रवार को पूरे परिसर में इस बात का नोटिस लगा दिया कि मॉल में किसी भी तरह के धार्मिक प्रार्थना की अनुमति नहीं होगी।

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