अंतरराष्ट्रीय
खाड़ी युद्ध : सरकारों को जनता में विश्वास जगाना बहुत जरुरी
राजीव लोचन साह, नैनीताल। एक बेहद कठिन दौर में फँस गये हैं हम। भ्रम और अनिश्चितता के कोहरे में दिखाई ही नहीं दे रहा है कि हम हैं कहाँ! मिसाइलें तेल अबीब और हैफा पर दागी जा रही हैं और खाने-पीने की दुकानें नैनीताल और मसूरी में बन्द हो रही हैं। हर चीज पर से भरोसा टूट रहा है। लोग न अपनी सरकार पर विश्वास कर रहे हैं और न अखबारों पर। सरकार कह रही है कि हमारे पास तेल और गैस का साठ दिन का भंडार मौजूद है, लेकिन जनता है कि लाईन लगाने से बाज़ नहीं आ रही है। पेट्रोल और डीजल ड्रमों में ही नहीं, बड़े-बड़े मर्तबानों में भी भर कर घर ले जाने के वीडियो सामने आ रहे हैं। रसोई गैस की लाईनों में गाली-गलौज, मार-पीट, झगड़ों की खबरें आम हैं। एक जगह से तो गैस की लाईन में लगे एक वृद्ध के देहान्त की खबर भी मिली। दस साल पहले प्रधानमंत्री द्वारा काला धन निकालने के प्रयास में की गई नोटबन्दी के बाद लाईनों में लगे लोगों ने खुशी-खुशी अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस बार ऐसा नहीं है। प्रधानमंत्री का जादू कम हुआ है। उन्होंने छः साल पहले जब आह्वान किया तो जनता ने कोरोना भगाने के लिये उत्साह से थालियाँ-कटोरे बजाये थे। अब यदि वे गैस की किल्लत कम करने के लिये थाली-कटोरे बजाने को कहेंगे तो लोग शायद ही ऐसा करने को राजी हों। युद्ध जैसे कठिन समय में जनता का अपनी सरकार पर विश्वास होना सबसे जरूरी है। इस वक्त वह भरोसा नहीं दिख रहा है। अनावश्यक रूप से सारी दुनिया को युद्ध में झोंक देने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रति तो वहाँ की जनता का गुस्सा फूट ही रहा है, जहाँ अमेरिकी संघ के लगभग हर राज्य के सैकड़ों शहरों में लाखों लोगों ने उनके विरोध में प्रदर्शन किये हैं। गनीमत है कि भारत में अभी ऐसा नहीं हुआ है। ऐसे समय में सरकार का मजबूती से खड़े रहना सबसे जरूरी होगा। मगर वह तभी सम्भव है, जब वह जो कह रही है अपने आचरण से उसके प्रति जनता का विश्वास भी जगा सके। नैनीताल समाचार से साभार





































