धर्मक्षेत्र
श्रीमद् भागवत का श्रवण करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं व भक्ति का होता है उदय
सीएन, ज्योलीकोट/नैनीताल। श्रीमद् भागवत का श्रवण करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और भक्ति का उदय होता है,लेकिन इसके लिए आचरण में शुद्धि, ईश्वर और धर्म पर पूर्ण श्रद्धा विश्वास रखना चाहिए़।गोल्ज्यू धाम चोपड़ा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में समापन प्रवचन करते आचार्य नीरज महादेव ने कहा कि धर्म के मार्ग का अनुसरण करते हुए जीवन के उद्देश्य को पूरा करना और संसार रूपी भवसागर से पार पा लेना जीवन का सफल होना है। उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से बचने का आह्वान किया। आचार्य ने संस्कारों के क्षय,बढ़ते सामाजिक ह्रास को समाज के भविष्य के लिए खतरा बताते कहा कि इसको रोकने के लिए भारतीय परम्पराओं का पालन,सामाजिक मूल्यों की स्थापना जरूरी हो गया है।
आज भक्ति पूर्ण वातावरण में मुख्य यजमान ललित मोहन बिष्ट, श्रीमती कमला बिष्ट, पुरोहित कैलाश जोशी,प्रताप जीना,गोपाल सिंह जीना, पुष्कर,हिमांशु,कन्नू बिष्ट,राजू बिष्ट,जीवन बिष्ट, हिमांशु बिष्ट आदि द्वारा पूर्णाहुति हवन ज्ञान पूजन किया गया। प्रसाद वितरण और भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत की। आयोजक ललित बिष्ट ने सभी का आभार व्यक्त किया। गोविंद बरगली,विनय,विक्रम,संजय बरगली कमल जीना, पुष्कर काठयत,स्थानीय युवाओं ने आयोजन को सफल बनाने में खास सहयोग दिया।
































