धर्मक्षेत्र
पाक-ए-रमजान : अल्लाह ने सभी आसमानी किताबें रमजान के महीने में ही दुनिया में नाज़िल की
पाक-ए-रमजान : अल्लाह ने सभी आसमानी किताबें रमजान के महीने में ही दुनिया में नाज़िल की
सीएन, नैनीताल। अपने दामन में अल्लाह की बेपनाह अजमतों, मसर्रतों, बरकतों एवं रहमतों को समेटे यह रमजान का पाकीजा महीना पहले अशरे की दहलीज पार कर दूसरे अशरे में प्रवेश कर चुका है। इबादत-ओ-रेयाजत का सिलसिला जारी है। दूसरे अशरे में कई आसमानी किताबें नाजिल हुई। अल्लाह ताला ने अपने बंदों को सीधा रास्ता दिखाने के लिए समय-समय पर अपने पैगंबरों और संदेष्टाओं को दुनिया में भेजा। दुनिया में लगभग 124000 नबी भेजे गए यह सभी इंसानों में से थे और लोगों को एक अल्लाह की तरफ बुलाते थे। उनमें से कुछ नबी ऐसे थे जिनको अल्लाह ने धार्मिक पुस्तकें प्रदान की थी जिनके मुताबिक वह अपने अनुयायियों को सत्य मार्ग दिखाते थे। जिन नबियों को यह ईश्वरीय ग्रंथ मिलते थे उन्हें रसूल कहा जाता है। हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी एक रसूल थे जिन्हें अल्लाह ताला ने कुरान जैसी मुक़द्दस किताब अता फ़रमाई। कुरान में 25 नबियों का वर्णन मिलता है। रमजानुल मुबारक के मुकद्दस महीने में पाक एवं मुकद्दस किताब कुरआन नाजिल यानी अवतरित हुई। कुरआन पाक से पहले भी कई आसमानी किताबें माहे रमजान में ही उतरीं। अल्लाह फरमाते है हमने मूसा को एक ऐसी किताब दी है जो हक़ और बातिल में फर्क बताती है। ताकि तुम हिदायत पा जाओ। अल्लाह फरमाते है हमने दाऊद को ज़ुबूर अता फ़रमाई। किसी ने नबी से पूछा की अल्लाह ने कितनी किताबे नाज़िल की हमारे नबी ने फ़रमाया 104 किताबें। जिनमें से 4 तो किताबें थी जो चार नबियों पर नाज़िल की गई और 100 सहाईफ़ मतलब रिसाले थे। नबी ने फ़रमाया 50 रिसाले शीश अलैहिसलाम पर 30 खुलुफ अलैहिसलाम पर 10 इब्राहिम अलैहिसलाम पर और तौरात से पहले अल्लाह ने मौसा अलैहिसलाम पर 10 रिसाले नाज़िल फरमाए। तौरात, ज़ुबूर अबरानी जबान में नाज़िल हुई, इंजील सुरानी जबान में नाज़िल हुई और क़ुरान अरबिक जबान में नाज़िल हुआ। अल्लाह ने सभी आसमानी किताबें रमजान के महीने में ही दुनिया में नाजिल यानी उतारीं। कुरआन-ए-पाक लौहे महफज से इसी महीने आया। विभिन्न हिस्सों में कुरआन दुनिया में आया, जिसमे 23 बरस लगे। हजरत दाऊद को जुबूर कुरआ जैसी किताब 18 या 21 रमजान को मिली थी। हजरत इब्राहिम के सहीफे रमजान की तीन तारीख को उतारे गए। हजरत मूसा को तौरेत छह रमजान को अता हुई और हजरत ईसा को इन्जील 12 या 13 रमजान के मिली। ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह महीना कितनी बरकतों वाला है। रमजान के रोजों की एक फजीलत यह भी है कि कयामत के दिन रोजेदार की मगफिरत यानी माफी के लिए अल्लाह की बारगाह में सिफारिश करेगा। इस माह हर नेकी के बदले 70 गुना सवाब मिलता है। इसी तरह हर गुनाह का अजाब भी ज्यादा है। शहाब बिन तारिक रहमतुल्लाह अलैह का बयान है कि अबूजर गफ्फारी से रिवायत है कि पूर्व में हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर माहे रमजान की तीन रातों में सहीफे नाजिल हुए और हजरत मूसा अलैहिस्सलाम पर तौरेत माहे रमजान की जुमा की रातों में नाजिल हुई। हजरत दाऊद अलैहिस्सलाम पर जबूर माहे रमजान की अठारहवीं रात को उतरी। हजरत ईसा अलैहिस्सलाम पर इंजील माहे रमजान की तेरह को नाजिल अवतरित हुई और रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर कुर्आन मजीद रमजानुल.मुबारक की चौदहवीं तारीख को नाजिल हुआ।
