उत्तराखण्ड
उत्तराखंड में भू-कानून लागू : 11 जिलों में बाहरी व्यक्तियों के लिए उधान व कृषि भूमि की खरीद पर प्रतिबंध
उत्तराखंड में भू-कानून लागू : 11 जिलों में बाहरी व्यक्तियों के लिए उधान व कृषि भूमि की खरीद पर प्रतिबंध
-हरिद्वार और उधम सिंह नगर में बाहरी व्यक्तियों के लिए भूमि की खरीद पर प्रतिबंध नही
सशक्त भू कानून लाने में सरकार ने कोई जिज्ञासा नहीं, जमीनों की बंदरबांट का रास्ता खुला छोड़ा: करन माहरा
सीएन, देहरादून। उत्तराखंड में भू कानून बिल लागू हो गया है। प्रदेश सरकार ने राज्य में सशक्त भू.कानून लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस संशोधित भू.कानून को मंजूरी दी गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश की जनता की लंबे समय से उठ रही मांग और उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस कानून का उद्देश्य राज्य के संसाधनों, सांस्कृतिक धरोहर और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार द्वारा 2018 में लागू किए गए सभी प्रावधान नए कानून में समाप्त कर दिए गए हैं। इससे पहले बाहरी व्यक्तियों को भूमि खरीदने में छूट दी गई थी, जिसे अब खत्म कर दिया गया है। हरिद्वार और उधम सिंह नगर को छोड़कर उत्तराखंड के अन्य 11 जिलों में बाहरी व्यक्तियों के लिए हॉर्टिकल्चर और एग्रीकल्चर भूमि की खरीद पर प्रतिबंध लगाया गया है। इससे स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलेगी। पहाड़ी इलाकों में भूमि का सही उपयोग सुनिश्चित करने और अतिक्रमण रोकने के लिए चकबंदी और बंदोबस्ती की जाएगी। इससे भूमि के छोटे-छोटे टुकड़ों को व्यवस्थित रूप से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा। भू कानून पास होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य, संस्कृति और मूल स्वरूप की रक्षा हमारी सरकार प्रदेश की जनता की लंबे समय से उठ रही मांग और उनकी भावनाओं का पूरी तरह सम्मान करते हुए आज कैबिनेट ने सख्त भू.कानून को मंजूरी दे दी है। यह ऐतिहासिक कदम राज्य के संसाधनों सांस्कृतिक धरोहर और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा, साथ ही प्रदेश की मूल पहचान को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जमीनों की बंदरबांट का रास्ता खुला छोड़ा: करन माहरा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने एक बयान जारी कर कहा कि जब भू कानून का मसौदा सदन के पटल पर रखा जाएगा, तभी उसको अध्ययन करने के बाद कोई प्रतिक्रिया दी जा सकेगी, लेकिन अभी जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार राज्य की जनता जिस सशक्त भू कानून की मांग कर रही थी। उसे लाने में सरकार ने कोई जिज्ञासा नहीं दिखाई है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट की ओर से पारित भू कानून केवल प्रदेश के 11 जिलों में लागू होगा। इन 11 जिलों में कृषि और वानिकी के लिए भूमि खरीद पर रोक होगी। हालांकि, अन्य प्रयोजनों के लिए शासन की सहमति से जमीन खरीदी जा सकेगी। माहरा का कहना है कि अब भी सरकार ने घुमा फिरा कर जमीन की बंदरबांट का रास्ता खोल रखा है। करन माहरा ने कहा कि मैदानी जिलों में ही भू कानून का सबसे ज्यादा दुरूपयोग हुआ है। ऐसे में वहां कृषि और बागवानी के नाम पर जमीन क्रय कर उसे कमर्शियल और रेजिडेंशियल एक्टिविटी के लिए उपयोग करते आ रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने आरोप लगाया कि कैबिनेट की ओर से पारित भू कानून में भू माफियाओं के लिए पूरी संभावनाएं छोड़ी गई है। इससे राज्य के आंदोलनकारी संगठनों और आम जनता में भारी निराशा है। उनका कहना है कि बीजेपी सरकार की ओर से ले गए भू कानून का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही पार्टी अपनी अग्रिम रणनीति तैयार करेगी।
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