क्राइम
जनसेवा केंद्र की आड़ में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र व अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार कर रहे शातिर जालसाज गिरफ्तार
सीएन, हरिद्वार। पुलिस की ओर से सत्यापन अभियान के दौरान जनसेवा केंद्र की आड़ में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार कर रहे शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है। उसके कमरे में मानवाधिकार जनसेवा केन्द्र का बोर्ड लगा मिला। पुलिस ने कमरे से लैपटॉप, प्रिंटर, आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र के कई दस्तावेज बरामद किए। पूछताछ में पता चला कि आरोपी अब तक एक हजार से अधिक लोगों को ऐसे फर्जी दस्तावेज बांट चुका है। एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने बताया कि एसएसपी नवनीत सिंह के निर्देश पर कलियर क्षेत्र में सत्यापन अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान टीम को सूचना मिली कि चारमीनार के पीछे एक होटल में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। पुलिस टीम ने होटल में छापेमारी की तो वहां शाहिदा मानवाधिकार जनसेवा केन्द्र का बोर्ड लगा मिला। कमरे के भीतर एक युवक लैपटॉप और प्रिंटर के माध्यम से आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बना रहा था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने अपना, नाम और पता शहनवाज पुत्र मोहम्मद प्यारे निवासी मुजफ्फरपुर, बिहार बताया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस पर धौंस जमाने की कोशिश की और खुद को मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बताया। उसने पुलिस को एक पहचान पत्र भी दिखाया, जो जांच के बाद पूरी तरह फर्जी पाया गया। आरोपी पिछले कुछ समय से होटल के इसी कमरे से सीएससी सेंटर की आड़ में अवैध धंधा संचालित कर रहा था। पुलिस ने जब मौके से बरामद जन्म प्रमाण पत्रों की जांच की, तो एक बड़ी लापरवाही और जालसाजी सामने आई। बरामद सभी जन्म प्रमाण पत्रों पर सीरियल नंबर एक अंकित था। इन दस्तावेजों पर उत्तराखंड सरकार का लोगो लगा था और ये चिकत्सिा एवं स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम रुद्रपुर के लेटर पैड पर जारी किए गए थे। आरोपी के पास से 45 तैयार फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, सात विभिन्न विभागों की रबर मुहरें, एक लैपटॉप, चार्जर और माउस, मोबाइल फोन, 06 आधार कार्ड, एक फर्जी मानवाधिकार आयोग पहचान पत्र आदि मिला है। पुलिस टीम में एसओ रविंदर कुमार, एसएसआई सुनील पंत सहित एलआईयू के सदस्य शामिल रहे। एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने बताया कि आरोपी से जब पूछताछ की गई तो पता चला कि जन्म प्रमाण पत्र बनाने, आधार कार्ड में परिवर्तन समेत अन्य सरकारी दस्तावेज बनाने के नाम पर युवक पांच सौ से एक हजार रुपये तक लेता था। उसने कहा कि जांच पड़ताल में पता चला है कि एक हजार से अधिक लोगों का फर्जी दस्तावेज बनाकर उनको दिया है। अन्य जांच की जा रही है।






















































