धर्मक्षेत्र
आज 3 फरवरी 2026 को है शब-ए-बारात : गुनाहों की माफी मांगने और सदका व खैरात से मदद करने का दिन
सीएन, नैनीताल। शब ए बारात मुस्लिम समुदाय का महत्वपूर्ण त्योहार है। इसे चन्द्र दर्शन के अनुसार मनाया जाता है। शब-ए-बारात एक पाक और महत्वपूर्ण रात है जिसे मुसलमान माफी और रहमत की रात के नाम से जानते हैं। यह रात हिजरी कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 14वीं और 15वीं रात के बीच आती है। हालांकि अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर शब-ए-बारात की तारीख हर साल अलग हो सकती है। शब-ए-बारात 2026 इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 15वीं रात को मनाई जाती है। भारत में शब-ए-बारात 2026 की तिथि 3 फरवरी 2026 (शाम से) से 4 फरवरी 2026 तक होने की संभावना है, लेकिन सटीक तारीख चांद नजर आने के बाद तय होती है। यह 15 शाबान 1447 हिजरी को मेल खाती है। शब का अर्थ है रात और बरात का मतलब होता है बरी होना या निजात पाना यानी अपनी गलतियों, गुनाहों और किस्मत की मांग के लिए एक खास रात। यह रूहानी रूप से अपने अतीत और भविष्य के बारे में दुआ मांगने, खुदा से माफी मांगने, और आध्यात्मिक रूप से आत्म-निरीक्षण करने की रात भी कही जाती है। शब-ए-बारात को गुनाहों की माफी की रात कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के गुनाह माफ कर देता है और उनकी दुआओं को सुनता है। कई मुसलमानों का विश्वास है कि इसी रात अल्लाह आगामी साल के लिए इंसानों की जिंदगी, मौत, rizq और तकदीर से जुड़े फैसले दर्ज करता है। इसीलिए लोग नमाज, दुआ और इबादत करते हैं। इसके अलावा, शब-ए-बारात को रमजान के आगमन से पहले आत्मिक रूप से खुद को तैयार करने का मौका भी माना जाता है। यह समय दिल से गलतियों को दूर करने, ताजा इरादों के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। इस रात मुसलमान मस्जिदों में और घरों में खास नमाज अदा करते हैं। कई लोग रात भर कुरान का पाठ करते हैं। खुदा को याद करते हुए अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस पवित्र रात को और भी खास बनाने के लिए कई लोग गरीबों और जरूरतमंदों को खाना, साफ कपड़े या दान (सदका) देते हैं। इससे दिल की नरमी और रहमत की अनुभूति होती है।शब-ए-बारात पर रोजा रखना वाजिब नहीं है, लेकिन संतों और विद्वानों के अनुसार नफल/सुनन रूप से रोजा रखा जा सकता है, खासकर शाबान के दिनों में। कुछ लोग शब-ए-बारात से पहले और उसके अगले दिन नफल रोजे भी रखते हैं। इस दौरान यतीमों, बेवाओं व गरीबों को सदका व खैरात से मदद की जाती है। मुसलमान झूठ, ईष्या, शराब, सूद, लड़ाई झगड़े से दूर रहने का संकल्प लेते हैं।

























































