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आज एक अगस्त से 7 अगस्त तक है विश्व स्तनपान सप्ताह : जागरूकता के लिए एक पूरा सप्ताह समर्पित

आज एक अगस्त से 7 अगस्त तक है विश्व स्तनपान सप्ताह : जागरूकता के लिए एक पूरा सप्ताह समर्पित
सीएन, नैनीताल।
वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक दुनिया भर में हर जगह ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं की रक्षा, प्रचार, समर्थन और प्रोत्साहित करने के लिए हर साल सेलिब्रेट किया जाता है। विश्व स्तनपान सप्ताह पहली बार वर्ष 1992 में मनाया गया था और तब से ही इसे दुनिया भर के आर्गेनाईजेशन और इंस्टीट्यूशन द्वारा मान्यता दी गई है। डब्ल्यूएबीए ने विषय को लेकर जागरूकता बढ़ाने और दुनिया भर के समुदायों में स्तनपान के बारे में अधिक जानकारी फैलाने के लिए एक पूरा सप्ताह समर्पित करने का निर्णय लिया थाए जिसने विश्व स्तनपान सप्ताह को जन्म दिया। वर्ल्ड एलायंस फॉर ब्रेस्टफीडिंग एक्शन हर साल वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक के लिए एक नई थीम और स्लोगन तैयार करता है। स्तनपान के महत्व को 1990 में विश्व स्तर पर मान्यता दी गई थी जब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन  और यूनाइटेड नेशन इंटरनेशनल चिल्ड्रन इमरजेंसी फंड ने ब्रेस्टफीडिंग को प्रोटेक्ट, प्रमोट और सपोर्ट करने के लिए मेमोरेंडम के रूप में क्रिएट किया गया था। यह इनोसेंट डिक्लेरेशन फॉर्मल डॉक्यूमेंट है जिसे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बनाया गया था जिसमें शामिल हैं। शिशु के लिए स्तनपान संरक्षण और संवर्धन का काम करता है। रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति नए जन्मे हुए बच्चे में नहीं होती है। यह शक्ति माँ के दूध से शिशु को हासिल होती है। माँ के दूध में लेक्टोफोर्मिन नामक तत्त्व होता है, जो बच्चे की आंत में लौह तत्त्व को बांध लेता है और लौह तत्त्व के अभाव में शिशु की आंत में रोगाणु पनप नहीं पाते। माँ के दूध से आए साधारण जीवाणु बच्चे की आंत में पनपते हैं और रोगाणुओं से प्रतिस्पर्धा कर उन्हें पनपने नहीं देते। माँ के दूध में रोगाणु नाशक तत्व होते हैं। माँ की आंत में वातावरण से पहुँचे रोगाणु, आंत में स्थित विशेष भाग के संपर्क में आते हैं जो उन रोगाणु.विशेष के खिलाफ प्रतिरोधात्मक तत्त्व बनाते हैं। ये तत्व एक विशेष नलिका थोरेसिक डक्ट से सीधे माँ के स्तन तक पहुँचते हैं और दूध के द्वारा बच्चे के पेट में। बच्चा इस तरह माँ का दूध पीकर सदा स्वस्थ रहता है। माँ का दूध जिन बच्चों को बचपन में पर्याप्त रूप से पीने को नहीं मिलता उनमें बचपन में शुरू होने वाली मधुमेह की बीमारी अधिक होती है। बुद्धि का विकास उन बच्चों में दूध पीने वाले बच्चों की अपेक्षाकृत कम होता है। अगर बच्चा समय से पूर्व जन्मा प्रीमेच्योर हो तो उसे बड़ी आंत का घातक रोग, नेक्रोटाइजिंग एंट्रोकोलाइटिस हो सकता है। अगर गाय का दूध पीतल के बर्तन में उबाल कर दिया गया हो तो उसे लीवर का रोग इंडियन चाइल्डहुड सिरोसिस हो सकता है। इसलिए माँ का दूध छह.आठ महीने तक बच्चे के लिए श्रेष्ठ ही नहीं, जीवन रक्षक भी होता है। स्तन में दूध पैदा होना एक नैसर्गिक प्रक्रिया है जब तक बच्चा दूध पीता है तब तक स्तन में दूध पैदा होता है एवं बच्चे के दूध पीना छोड़ने के पश्चात कुछ समय बाद अपने आप ही स्तन से दूध बनना बंद हो जाता है।

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