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एक कुत्ते की वजह से 25 साल तक चैन की नीद नही सो सका पुलिस का जवान

सीएन,.चंडीगढ़। हरियाणा राज्य में वो एक शादी की रात थी। जश्न, खाना-पीना, डांस और बातों के बीच एक ऐसी घटना हुई, जिसके चलते एक पुलिस सिपाही को पूरे 25 साल तक लड़ाई लड़नी पड़ी। एक कुत्ते की वजह से 25 साल तक चैन की नीद नही सो सका पुलिस का जवान। आखिरकार, उनके इंतजार का फल मिला। एक कुत्ते की वजह से पुलिस सिपाही की किस्मत ही बदल गई। जी हाँ, उस शादी वाले दिन जो घटना हुई थी, वो थी एक पुलिस डॉग के लापता होने का मामला। पूरे 25 साल बाद इस मामले का सुखद अंत हुआ है और सिपाही ने चैन की नींद ली है। यह घटना हरियाणा की है। पुलिस कांस्टेबल जगमाल सिंह सीआईडी पुलिस विभाग में काम करते थे। खास बात यह है कि सीआईडी डॉग स्क्वाड की जिम्मेदारी जगमाल सिंह ही संभाल रहे थे। सीआईडी कुत्तों की देखभाल का काम वैसे तो कांस्टेबल प्रमोद कुमार को दिया गया था, लेकिन निगरानी जगमाल सिंह को ही करनी होती थी। यह साल 2000 की बात है, 19 जून की रात। हरियाणा में पुलिस कांस्टेबल जगमाल सिंह के पड़ोस में एक शादी का कार्यक्रम था। जगमाल सिंह समेत कई लोगों को न्योता दिया गया था। जगमाल सिंह परिवार के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उनके घर पर लाइका नाम का एक ट्रेंड सीआईडी डॉग था, जो शादी के खाने और तेज म्यूजिक के शोर में कहीं भाग गया। लाइका कुत्ते को 19 जून की रात और अगले पूरे दिन ढूंढा गया, लेकिन वह नहीं मिला। शुरू में जगमाल सिंह ने सोचा कि वह यहीं कहीं होगा, लेकिन बाद में हर जगह तलाशी ली। पर उसका कोई पता नहीं चला। 22 जून की शाम को जगमाल सिंह ने कुत्ते के लापता होने की सूचना अपने सीनियर पुलिस अधिकारियों को दी। सीआईडी को इस पुलिस डॉग लाइका से काफी उम्मीदें थीं। इस कुत्ते का गायब होना सीनियर अधिकारियों के लिए सिरदर्द बन गया। जगमाल सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। कुत्ते के लापता होने के लिए जगमाल सिंह को जिम्मेदार ठहराया गया। उन पर लापरवाही और सीनियर अधिकारियों को तुरंत जानकारी न देकर बात छिपाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया गया। जांच में पुलिस की आंतरिक रिपोर्ट ने कांस्टेबल जगमाल सिंह को दोषी पाया। गलती के लिए सीनियर अधिकारियों ने जगमाल सिंह को सजा सुनाई। उनकी सैलरी में बढ़ोतरी रोक दी गई और परमानेंट होने की प्रक्रिया पर भी ब्रेक लग गया। छोटी-मोटी सजा की उम्मीद कर रहे जगमाल सिंह के लिए यह एक बड़ा झटका था। इसलिए, जगमाल सिंह ने हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एक तरफ सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद कानूनी लड़ाई शुरू हो गई थी। इसी बीच, एक महीने बाद लापता हुआ लाइका कुत्ता मिल गया। कुत्ता बिना किसी समस्या के वापस आ गया था। लेकिन जगमाल सिंह को दी गई सजा वैसी ही बनी रही। एक तरफ कानूनी लड़ाई शुरू करने वाले जगमाल सिंह ने बिना सैलरी बढ़ोतरी और बिना परमानेंट हुए 25 साल तक नौकरी की। एक लापता कुत्ते का मामला 25 साल तक चला। लेकिन जगमाल सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और लड़ाई जारी रखी। अब 24 दिसंबर को हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने जगमाल सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि कुत्ते के लापता होने के मामले में दी गई सजा बहुत गंभीर थी। यह एक जायज सजा नहीं है। एक छोटी सी गलती के लिए इतनी बड़ी सजा देना ठीक नहीं है। 25 साल बाद, जगमाल सिंह अब चैन की नींद सो सकेंगे।

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