उत्तराखण्ड
अंकिता मर्डर केस की जांच सीबीआई को सौंपने व वीआईपी का नाम उजागर करने को हजारों लोगों ने सीएम आवास का किया घेराव
सीएन, देहरादून। अंकिता भंडारी मर्डर केस की जांच CBI को सौंपने और VIP का नाम सार्वजनिक करने की मांग करते हुए आज करीब हजारों लोग देहरादून में सीएम आवास का घेराव करने निकले। कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल सहित अन्य राजनीतिक दलों ने इसमें हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर और पोस्टर लिए करीब 11 बजे परेड ग्राउंड से निकले। पूरे रास्ते वह “अंकिता भंडारी को न्याय दो”, “सरकार जवाब दो” और “बीजेपी सरकार मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाते रहे। लोगों की भीड़ को CM आवास से पहले रोकने लिए प्रशासन ने भी पूरी तैयारी कर रखी थी। सीएम आवास से 2 किलोमीटर पहले हाथीबड़कला में करीब 450 पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया था, जिन्होंने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। इस दौरान काफी देर तक बैरिकेडिंग के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की हुई। कुछ लोग बैरिकेडिंग पर चढ़ आगे बढ़ने की कोशिश करते दिखे तो कुछ पुलिस कर्मी हाथ जोड़कर लोगों को समझाते हुए दिखे। हालांकि करीब चार घंटे बाद प्रदर्शनकारियों की भीड़ को वापस भेज दिया गया और ये प्रदर्शन धीरे-धीरे खत्म हो गया।प्रदर्शन में कांग्रेस, यूकेडी के अलावा, सुराज सेवा दल, बेरोजगार संगठन, राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी, राज्य आंदोलनकारी मंच सहित कई जनपक्षधर संगठनों के कार्यकर्ता शामिल रहे। इस दौरान आक्रोशित लोग VIP का नाम सार्वजनिक करने की मांग करते दिखे। हालांकि बीते कल ही पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर क्लियर किया था कि SIT की जांच में VIP धर्मेंद्र नाम के एक व्यक्ति को माना गया था। उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक रिसॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करने वाली अंकिता भंडारी तीन साल पहले यानी 18 सितंबर 2022 को अचानक गायब हो गई और बाद में उसकी लाश एक नहर के पास मिली थी। अंकिता की हत्या का आरोप रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और रिसॉर्ट के असिस्टेंट मैनेजर पर लगा था। उस वक्त राज्य के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया था कि अंकिता ने अपने एक दोस्त को चैट पर बताया था कि उसे रिसॉर्ट के VIP को ‘विशेष सेवाएं’ देने के लिए मजबूर किया जा रहा था। 19 साल की अंकिता की हत्या के बाद न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में आक्रोश है।











































