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आज मंगलवार को है कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी : घर में पूजा करने से दूर होते हैं नकारात्मक प्रभाव

आज मंगलवार को है कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी : घर में पूजा करने से दूर होते हैं नकारात्मक प्रभाव
सीएन, प्रयागराज।
हर माह में 2 बार चतुर्थी व्रत किया जाता है। यह तिथि भगवान शिव के पुत्र गणपति बप्पा को समर्पित है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह पर्व 25 जून को पड़ रहा है। इस शुभ तिथि पर भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता हैए साल भर में 12.3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 25 जून को देर रात 01 बजकर 23 मिनट पर होगी। वहीं इसका समापन 25 जून को रात 11 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में 25 जून को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें। अब एक चौकी पर लाल लपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा विराजमान करें। उन्हें दूर्वा घास और तिलक अर्पित करें। इसके बाद देशी घी का दीपक जलाएं और आरती करें। मंत्रों का जप और गणेश चालीसा का पाठ करें। प्रभु को मोदक, फल और मिठाई का भोग लगाएं। जीवन में सुख.शांति के लिए प्रभु से विनती करें। अंत में लोगों में प्रसाद का वितरण करें और श्रद्धा अनुसार विशेष चीजों का दान करें।
गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्॥
ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्॥
ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्॥

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