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सीमा पर भारत की जिस प्रकार तैयारी चल रही है वह बात चीन को पसंद नहीं


सीएन, नई दिल्ली। जून 2020 गलवान की घटना के करीब ढाई साल बाद चीन की ओर से दोबारा ही ऐसी हिमाकत करने की कोशिश हुई। 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीन के सैनिकों की ओर भारतीय सीमा में दाखिल होने की कोशिश हुई लेकिन भारतीय सैनिकों के आगे चीन की एक न चली। भारतीय सैनिकों ने भी चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया और चीन का एक भी सैनिक भारत की धरती पर दाखिल नहीं हो सका। चीन को भारत की ताकत का अहसास हो चुका है और उसके बौखलाहट के पीछे भी यही कारण है। भारतीय सेना की ताकत हाल के वर्षों में काफी बढ़ी है तभी यह कहा जा रहा है कि यह 1962 नहीं है। चीन की ओर से ऐसी हरकत की गई उसके पीछे कई रक्षा एक्सपर्ट का यही मानना है कि भारत की जिस प्रकार तैयारी चल रही है वह बात उसे पसंद नहीं आ रही है। पिछले कुछ समय में भारत ने लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत किया है। चीन की तैयारी के बीच भारत की ओर से भी सेना की ताकत बढ़ाए जाने पर जोर है। मोदी सरकार की ओर से रक्षा बजट बढ़ाया गया है और एलएसी के पास इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर है। सरकार का जोर चीन से सटे सीमा पर भारतीय सेना की ताकत कैसे बढ़े इस पर है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने और भारतीय सैनिकों तक तत्काल पहुंच के मद्देनजर सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश में सड़क के साथ ही सुरंग, पुल और एयरबेस का भी निर्माण किया जा रहा है। अरुणाचल फ्रंटियर हाइवे प्रोजेक्ट पर काम शुरू है। जब यह सारे प्रोजेक्ट पूरे हो जाएंगे तब एलएसी तक भारतीय सैनिकों की पहुंच और भी आसान हो जाएगी। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अरुणाचल प्रदेश में केंद्र सरकार ने खास पैकेज के तहत 2319 किलोमीटर सड़क बनाने की मंजूरी दी है जिसमें 1150 किमी से अधिक सड़क का निर्माण हो चुका है। पिछले मानसून सत्र में सरकार की ओर से यह बताया गया कि केंद्र सरकार ने पिछले 5 सालों में चीन की सीमा से लगे इलाकों में करीब 2100 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया है जिसके लिए 15 हजार 477 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 3 हजार 595 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना पर 20 हजार 767 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जिसमें बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार के साथ का बॉर्डर एरिया है। रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बताया था कि पिछले 5 साल में चीन के साथ लगी सीमा पर 2088 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया है। वहीं पाकिस्तान के साथ बॉर्डर पर 1336 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 4242 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके साथ ही म्यांमार, बांग्लादेश की सीमा के साथ भी सड़क निर्माण जोरों पर है। तवांग में भारत और चीनी सैनिकों की झड़प के बीच सेला टनल की भी चर्चा जोरों पर है। सेला टनल भारतीय सेना के लिए एक मजबूत लाइफ लाइन होगी। अरुणाचल प्रदेश में 13 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सेला सुरंग लगभग बनकर तैयार है और इसके जनवरी 2023 में शुरू होने की उम्मीद है। इस सुरंग के जरिए चीन की सीमा के पास से गुजरने वाले तवांग सेक्टर तक मिसाइल और टैंक आसानी से पहुंच जाएंगे। इस सुरंग को खास तकनीक का प्रयोग करके बनाया गया है। हर मौसम में इस टनल से कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह टनल तवांग और वेस्ट कामेंग जिलों के बीच की यात्रा दूरी को 6 किलोमीटर और ट्रैवल टाइम को एक घंटा कम कर देगी। चीन के साथ सीमा विवाद के बीच भारत चीन से मुकाबले के लिए पूरी तरह से तैयारी कर रहा है। भारत का रक्षा बजट बढ़ाया गया है। सेना को विदेशी और स्वदेशी अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया जा रहा है। पूर्वी लद्दाख में विवाद के बीच भारत ने चीन से सटी सीमा पर हाई फ्रीक्वेंसी एयर डिफेंस सिस्टम, लेजर गाइडेट अत्याधुनिक मिसाइलें, मॉर्डन ड्रोन, आर्टिलरी गन, अत्याधुनिक कार्बाइन, पहाड़ी और दुर्गम स्थानों के अनुरूप तैयार टैंक को भी तैनात किया है। इतना ही नहीं बॉर्डर पर सर्विलांस बढ़ाने के लिए सेना को लेटेस्ट हार्डवेयर से भी लैस किया जा रहा है। पूर्वी लद्दाख के उंचाई वाले इलाके में पहले जवानों के रहने का इंतजाम 10 हजार था अब वह संख्या बढ़कर 22 हजार से अधिक जा पहुंची है। पूरी तरह से आधुनिक और कॉम्पैक्ट शेल्टर 15 हजार, 16 हजार और 18 हजार की उंचाई पर बनाए गए हैं। 3 डी बंकर बनाए जा रहे हैं जिस पर टैंक से करीब से भी हमला किया जाएगा तो तब भी वे इसका सामना कर पाएंगे।

साभार एनबीटी

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