राष्ट्रीय
आज 12 फरवरी 2026 को है महर्षि दयानंद सरस्वती की जंयती, 19वीं सदी के एक बड़े समाज सुधारक और धार्मिक नेता
सीएन, नैनीताल। हर साल फाल्गुन मास में महर्षि दयानंद सरस्वती की जंयती मनाई जाती है। ये दिन हिंदू धर्म के लोगों के लिए बेहद खास है। महर्षि दयानंद सरस्वती आर्य समाज के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं और इन्हीं से प्रेरित होकर बाद में बाल गंगाधर तिलक, राम प्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद जैसे राष्ट्रभक्तों ने देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान दिया। महर्षि दयानंद सरस्वती 19वीं सदी के समय के बहुत बड़े सामाजिक सुधारक और राष्ट्रीय दृष्टि से भारत के आजादी के आंदोलन में अपने जीवन की आहुति देने वाले महापुरुषों में से एक थे। महर्षि दयानंद सरस्वती 19वीं सदी के एक बड़े समाज सुधारक और धार्मिक नेता थे। वे आर्य समाज के संस्थापक माने जाते हैं। सच्चे हिन्दू धर्म की पहचान करना, धार्मिक अंधविश्वास और कुरीतियों का विरोध करना, वेदों को सही रूप में समझाना और बाल विवाह, सती प्रथा, जातिवाद आदि के खिलाफ लड़ाई ही उनके जीवन का उद्देश्य था। महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती हर साल 12 फरवरी को मनाई जाती है, क्योंकि महान समाज-सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्म भी 12 फरवरी 1824 को हुआ था। इसलिए साल 2026 में उनकी जयंती 12 फरवरी, गुरुवार को मनाई जाएगी। स्वामी दयानंद सरस्वती की मृत्यु 1 अक्टूबर 1883 को राजस्थान के माउंट आबू में हुई थी। ये वही स्थान है जहां उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय में तपस्या और चिंतन किया था। स्वामी विरजानन्द स्वामी विरजानन्द (1778-1868), संस्कृत के विद्वान, वैदिक गुरु और आर्य समाज संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती के गुरु थे। महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती इसलिए मनाई जाती है क्योंकि वे आर्य समाज के संस्थापक, एक महान सामाजिक सुधारक, और वेदों के पुनरुद्धार के प्रवर्तक थे। उनकी शिक्षाएँ और कार्य आज भी भारतीय समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। महर्षि दयानंद ने ‘वेद ही हमारा धर्म है’ की भावना को फैलाया। उन्होंने समाज को वेदों की ओर लौटने और सच्चे ज्ञान की ओर जाने का मार्ग दिखाया। उनका जीवन समाज में फैली कुरीतियों जैसे जातिवाद, मूर्तिपूजा, बाल विवाह, सती प्रथा, अंधविश्वास और छुआछूत इन सबके खिलाफ संघर्ष से भरा रहा। उनकी प्रेरणा से कई सामाजिक सुधार हुए और लोगों में जागरूकता आई। उन्होंने आर्य समाज की स्थापना की, जो आज भी आर्य समाज देश भर में शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक कार्यों के लिए सक्रिय है। महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनके सामाजिक सुधारों, वैदिक पुनरुत्थान और नैतिक शिक्षाओं को याद करने का दिन है। उनकी प्रेरणा से आर्य समाज का गठन हुआ, जिसने शिक्षा, समाज सेवा और महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे कार्यों को बढ़ावा दिया। उनकी जयंती पर हम सत्य, धर्म और नैतिकता के सिद्धांतों को फिर से अपनाने और समाज में सुधार की दिशा में काम करने की प्रेरणा लेते हैं।





























































