क्राइम
उत्तराखंड के बाजपुर में तैयार हो रहे हैं फर्जी प्रमाणपत्र : रैकेट का हुआ भंडाफोड़, नगर पंचायत चैयरमैन सहित चार हिरासत में लिए
सीएन, बाजपुर। मेडिकल कॉलेजों में दाखिले और सरकारी रोजगार के लिए फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने के मामले का प्रशासन ने बुधवार देर रात भंडाफोड़ किया। मामले में पीलीभीत यूपी क्षेत्र के एक नगर पंचायत चेयरमैन और एक महिला समेत चार संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में प्रमाणपत्रों में गलत पते दर्ज कराने, फर्जी मकान मालिक और रिश्तेदारों को गवाह के तौर पर पेश करने तथा दस्तावेजों में कूटरचना किए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन मामले में मुकदमा दर्ज कराने की विधिक प्रक्रिया में जुटा है। बुधवार देर रात एडीएम पंकज उपाध्याय ने बताया कि शासन, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी के निर्देश पर मेडिकल, इंजीनियरिंग और सेवायोजन से जुड़े प्रमाणपत्रों का एसडीएम स्तर पर अनिवार्य भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत बाजपुर एसडीएम के समक्ष मेडिकल प्रवेश से संबंधित कुछ प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए आए थे। स्थलीय जांच में प्रमाणपत्रों पर दर्ज कई पते फर्जी पाए गए। पूछताछ में सामने आया कि सत्यापन प्रक्रिया को पार कराने के लिए बाहरी लोगों को फर्जी मकान मालिक और चाचा बनाकर अधिकारियों के सामने पेश किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि उत्तर प्रदेश के बरेली और आसपास के क्षेत्रों के लोग बाजपुर के पते पर अवैध तरीके से उत्तराखंड के स्थानीय प्रमाणपत्र हासिल करने का प्रयास कर रहे थे। आशंका है कि वोटर लिस्ट, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर, आधार कार्ड और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में हेरफेर कर कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए गए। नगर पंचायत चेयरमैन की संलिप्तता के संबंध में एडीएम ने कहा कि पूछताछ और प्राथमिक जांच में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि साक्ष्य संकलन और विस्तृत जांच के बाद ही होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम के अलावा एसडीएम ऋचा सिंह, सीओ अखिलेश कुमार, कोतवाल नरेश चौहान और तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान समेत राजस्व विभाग की टीम तहसील में मौजूद रही। अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए संदिग्धों से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने वाले नेटवर्क, दस्तावेज जुटाने वाले बिचौलियों और स्थानीय स्तर पर इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में पूछताछ की। एडीएम ने बताया कि अब तक सामने आए मामलों में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले से संबंधित प्रमाणपत्रों की संख्या सबसे अधिक है। प्रशासन इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि कहीं कोई संगठित गिरोह राज्य कोटे की सीटों पर अपात्र लोगों को दाखिला दिलाकर स्थानीय अभ्यर्थियों के हक को प्रभावित तो नहीं कर रहा। पुलिस को स्थानीय कार्यालयों के कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत, अंतरराज्यीय नेटवर्क के प्रत्येक पहलू की जांच के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा कि गलत दस्तावेजों के आधार पर जिन अभ्यर्थियों ने दाखिला पाया है, उनके प्रवेश निरस्त कर सीटें रिक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी। जिलेभर में सामने आए 19 अन्य संदिग्ध प्रकरण संबंधित उपजिलाधिकारियों को सौंपे गए हैं और तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी गई है। फर्जी पाए जाने वाले प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।





















































