उत्तराखण्ड
पहाड़ों में अनियंत्रित पर्यटन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणाम : जस्टिस दयाल
सीएन, नैनीताल। पर्यटन नगरी नैनीताल में हिमालयन इकोज कुमाऊं फेस्टिवल ऑफ लिटरेचर एंड आर्ट्स के 11वें संस्करण का एबट्सफोर्ड एस्टेट में शुभारंभ हुआ। हिमालयन इकोज में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने पहाड़ों में अनियंत्रित पर्यटन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित पर्यटन पहाड़ों और मौसम को नुकसान पहुंचा रहा है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और उत्तराखंड पर्यटन के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय महोत्सव में न्यायमूर्ति दयाल ने कहा कि पहाड़ों में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई जगह हवाई सेवाएं भी शुरू हो गई हैं। पर्यटन को व्यवस्थित करने के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे के साथ लोगों में जागरूकता भी जरूरी है, ताकि वे पहाड़ों में आकर वहां के पर्यावरण के अनुकूल व्यवहार करें। वाहनों की बढ़ती भीड़ और अनियंत्रित पर्यटन पहाड़ों के पर्यावरण और मौसम को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर पहले से ही पहाड़ों पर पड़ रहा है। ऐसे में छोटे स्तर पर भी पर्यटन गतिविधियों का जिम्मेदारी से प्रबंधन करना होगा, अन्यथा हमारे पहाड़ों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री के संयुक्त राष्ट्र में दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि नेपाल को हो रहे नुकसान की तुलना में उसे बहुत कम सहायता मिल रही है। न्यायपालिका के संबंध में उन्होंने कहा कि न्यायालयों और सभी सार्वजनिक संस्थानों को संविधान के दायरे में रहकर बिना किसी भय या पक्षपात के काम करना चाहिए। जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए मामलों का समय पर निस्तारण जरूरी है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश का फैसला अंततः विश्लेषण के बाद उसके अंतर्ज्ञान से निकलता है। यह अंतर्ज्ञान पहाड़ों के घास के मैदानों में टहलते हुए भी महसूस किया जा सकता है। इस अवसर पर पीपल का पौंधारोपण करने वाले पीपल बाबा स्वामी प्रेम परिवर्तन ने कहा कि पीपल को भूतिया वृक्ष मानने की अवधारणा बिल्कुल गलत है। पीपल वृक्ष इस मौके पर पौराणिक कथा लेखिका सुनीता पंत, स्वीटजरलैंड से आये यात्री बैंजामिन, सहित एक दर्जन से अधिक विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर हिमालयन इकोज कुमाऊं फेस्टिवल ऑफ लिटरेचर एंड आर्ट्स की संस्थापक जाहन्वी प्रसाद ने सभी का आभार व्यक्त किया।


















































