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उत्तराखण्ड

भगवान श्री राम किसी सत्ता, संस्था या राजनीति के नहीं—वह भारत की आत्मा हैं…पूरन महरा

सीएन, नैनीताल। अयोध्या में यदि किसी कर्मचारी ने अपराध किया है तो उसे कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना चाहिए। किंतु उस अपराध को आधार बनाकर भगवान श्रीराम, अयोध्या की गौरवशाली परंपरा, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सनातन संस्कृति को कटघरे में खड़ा करना न न्याय है, न राष्ट्रहित। अपराध व्यक्ति का होता है, आस्था का नहीं; दोष कर्मचारियों का है करोड़ों भावनाओं का नहीं। भारत आज 145 करोड़ से अधिक नागरिकों के आत्मविश्वास, उपलब्धियों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी है। विश्व मंच पर भारतीय प्रतिभाएँ अपनी पहचान स्थापित कर रही हैं। जिन समाजों और वर्गों को दशकों तक उपेक्षा का सामना करना पड़ा, वे आज सम्मान और अवसर प्राप्त कर रहे हैं। यह केवल विकास का नहीं, बल्कि आत्मगौरव के पुनर्जागरण का भी समय है। ऐसे समय में अयोध्या में कुछ कर्मचारियों द्वारा किए गए कथित अपराध को इस प्रकार प्रस्तुत करना कि मानो पूरी अयोध्या, श्रीराम मंदिर और सनातन परंपरा ही संदेह के घेरे में आ गई हो, न तो न्यायोचित है और न ही विवेकपूर्ण। यदि किसी कर्मचारी ने चोरी, भ्रष्टाचार या अन्य अपराध किया है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच हो, दोष सिद्ध होने पर कठोर दंड मिले। किसी कर्मचारी का अपराध व्यक्तिगत और कानूनी उत्तरदायित्व का विषय है। लेकिन कुछ व्यक्तियों के अपराध को करोड़ों लोगों की आस्था पर आक्रमण का माध्यम बना देना स्वीकार्य नहीं हो सकता। अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। भगवान श्रीराम किसी सरकार, किसी राजनीतिक दल, किसी ट्रस्ट या किसी संस्था की सीमाओं में बंधे नहीं हैं। वे सत्य, मर्यादा, न्याय, करुणा, कर्तव्य और राष्ट्रधर्म के शाश्वत आदर्श हैं। इसलिए किसी प्रशासनिक या आपराधिक घटना को भगवान श्रीराम की प्रतिष्ठा से जोड़ना हमारी सांस्कृतिक समझ की दुर्बलता को दर्शाता है। भारत के लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सभी को है, किंतु आलोचना तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि ऐसी राजनीति पर जो समाज को बाँटे और आस्था को विवाद का विषय बनाए। जिस प्रकार इस घटना को राजनीतिक रंग देकर पूरे अयोध्या को कलंकित करने का प्रयास किया जा रहा है, वह कई लोगों 6 दिसंबर 1992 से पूर्व में हुए वैचारिक और राजनीतिक संघर्षों की याद दिलाता है। दुर्भाग्य से कुछ लोग हर घटना को सनातन परंपरा और अयोध्या की प्रतिष्ठा पर प्रहार का अवसर मान लेते हैं। 
यह भी स्मरण रखना चाहिए कि उत्तर प्रदेश ने लंबे समय तक अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना किया। कानून-व्यवस्था, जघन्य अपराध , बिजली, पानी और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में व्यापक समस्याएँ थीं। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए पिछले वर्षों में अनेक प्रयास हुए हैं। इसी कारण आज उत्तर प्रदेश की छवि कई क्षेत्रों में उत्तम प्रदेश के तौर बदली है और विकास तथा निवेश के संदर्भ में उसकी नई पहचान बनी है। मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के कार्यों पर मतभेद हो सकते हैं, किंतु यह भी तथ्य है कि वे मुख्यमंत्री बनने से पहले भी गोरखनाथ मठ के माध्यम से सामाजिक सेवा से जुडे रहे लाखों लोगों का  मानना है कि उन्होंने समाज में आत्मविश्वास और धार्मिक राजनीतिक सामाजिक सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का निरंतर प्रयास किया। जो लोग कभी भगवान राम और अयोध्या से दूरी बनाते दिखाई देते थे, वे आज स्वयं को राम और अयोध्या का सबसे बड़ा हितैषी बताने का प्रयास कर रहे हैं। किसी भी व्यक्ति या समूह की निष्ठा का आकलन उसके शब्दों से अधिक उसके आचरण से होता है।भगवान राम की जन्मस्थली गर्भ गृह के संबंध में पूर्व का अनुभव भी लोगों के मन मस्तिष्क पर छाया हुआ है आज अयोध्या में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु भगवान श्रीराम के दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय आत्मविश्वास के पुनर्जागरण का जीवंत प्रमाण है। किसी एक घटना से यह विश्वास न कभी डगमगाया है और न आगे डगमगाएगा। सनातन संस्कृति ने हजारों वर्षों में असंख्य संकट, आक्रमण और षड्यंत्र देखे हैं। फिर भी उसका प्रकाश कभी मंद नहीं पड़ा। कुछ व्यक्तियों के अपराध न भगवान श्रीराम की महिमा को कम कर सकते हैं, न अयोध्या की गरिमा को और न ही सनातन संस्कृति की विशालता को।
इसलिए आवश्यक है कि अपराधी को दंड मिले, व्यवस्था और अधिक पारदर्शी बने, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी व्यक्ति की गलती को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के विरुद्ध राजनीतिक हथियार न बनाया जाए।
अयोध्या विश्वास है, विरासत है, संस्कृति है और भारत की आत्मा का स्पंदन है। कुछ व्यक्तियों के अपराध उसकी पहचान नहीं बन सकते। भगवान श्रीराम मर्यादा के शाश्वत प्रतीक हैं, और उनकी महिमा किसी क्षणिक विवाद से कहीं अधिक विराट है। नोट : लेखक पूरन सिंह मेहरा राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे हैं तथा उससे संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं के प्रत्यक्ष साक्षी और सहभागी रहे

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