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धर्मक्षेत्र

उत्तराखंड : आस्था और भक्ति का दिव्य संगम : फेणीनाग मार्ग पर स्थित कमेड़ी देवी

सीएन, बेरीनाग। कुमाऊँ की पावन धरती पर आस्था का अनमोल केंद्र कमेड़ी देवी मंदिर प्राचीन काल से आस्था व भक्ति का संगम है  है। बेरीनाग से फेणीनाग की ओर जाते समय मार्ग पर स्थित यह प्राचीन मंदिर न सिर्फ स्थानीय लोगों की ईष्ट देवी का धाम है, बल्कि यात्रियों के लिए भी आध्यात्मिक शरण और सद्भाव का  है। प्राकृतिक वातावरण के बीच विराजित यह देवस्थल वर्षों से क्षेत्र की सामाजिक–धार्मिक चेतना का आधार माना जाता है। बेरीनाग की शांत वादियों से होते हुए फेणीनाग के प्राचीन नाग–धाम की ओर बढ़ते समय यात्रियों को सबसे पहले जिस देवी का आशीष मिलता है, वह है कमेड़ी देवी। मंदिर का वातावरण इतना अलौकिक और शांतिदायक है कि सफर में यह एक अत्यंत पवित्र पड़ाव जैसा प्रतीत होता है। भक्तों का कहना है कि—कमेड़ी देवी के दर्शन किए बिना फेणीनाग यात्रा अधूरी मानी जाती है। स्थानीय जनमान्यता के अनुसार कमेड़ी देवी क्षेत्र की रक्षा–देवी और सुख–समृद्धि की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। लोक–कथा है कि देवी ने इसी स्थान पर कछुआनुमा चट्टान (कमेड़ी) के रूप में प्रकट होकर आसपास के गांवों को रक्षा का वरदान दिया था। इसी कारण देवी को ‘कमेड़ी माता’ कहकर श्रद्धापूर्वक पुकारा जाता है।फेणीनाग यात्रा पर निकले श्रद्धालु यहां रुककर दीपदान, नारियल अर्पण, विशेष पूजन, तथा मनोकामना यज्ञकरते हैं। घने चीड़–बांज के जंगलों, शांत पर्वतीय हवा और दूर-दूर तक फैली हिमालयी छटाओं के बीच स्थित यह मंदिर आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।
यात्रियों का कहना है कि देवी के चरणों में बैठते ही मन स्वतः ही शांत हो जाता है। खत्याड़ी, बेरीनाग और आसपास के गांवों के लोग जन्म, विवाह, खेत–पूजन, प्रवास और पर्व–त्योहारों की शुरुआत कमेड़ी देवी के आशीर्वाद से ही करते हैं।
ग्रामीणों का विश्वास है कि देवी की कृपा से परिवार में सुख–शांति बनी रहती है,रोग–बाधाएं दूर होती हैं,और यात्रा शुभ बनती है फेणीनाग–कमेड़ी देवी मार्ग धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से और अधिक सुगम व आकर्षक बन सके।कमेड़ी देवी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि बेरीनाग–फेणीनाग मार्ग का आध्यात्मिक ध्रुव–तारा भी है। हर दिन सैकड़ों भक्त यहां पहुंचकर माता से संरक्षण, साहस और कल्याण की कामना करते हैं। यह देवस्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कुमाऊँ की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत और भक्ति–परंपरा का सजीव प्रतीक बनकर आगे बढ़ रहा है।

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