राष्ट्रीय
सरकार मुसलमानों से बीफ न खाने का नियम बना सकती है, धार्मिक कुर्बानी जारी रहेगी : हूमायूं कबीर
सीएन, कोलकाता। आम जनता उन्नयन पार्टी के चीफ हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को चैलेंज दिया है। पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत राज्य सरकार द्वारा जनता के लिए जारी नोटिस पर हुमायूं कबीर ने ये चैलेंज दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार मुसलमानों से बीफ न खाने का नियम बना सकती है, लेकिन धार्मिक कुर्बानी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि संविधान का सम्मान करना चाहिए, लेकिन कुर्बानी होगी। कबीर ने आगे कहा कि गाय की कुर्बानी भी होगी, बकरे की भी होगी और ऊंट की भी होगी। कुर्बानी के लिए जो पशु जायज हैं, उनकी कुर्बानी होंगी। बीजेपी सरकार को मैं चेतावनी देता हूं, सुवेंदु अधिकारी से सीधे तौर पर कह रहा हूं कि आग से मत खेलो। अगर वे कुर्बानी पर रोक लगाने की कोशिश करते हैं तो इससे उनके लिए ही मुश्किलें खड़ी होंगी। मुस्लिम समुदाय किसी भी हाल में कुर्बानी के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा कि 37 प्रतिशत से अधिक मुसलमान गाय का गोश्त खाते हैं। सबसे पहले स्लॉटर हाउस बंद करना चाहिए। उन्हें तो लाइसेंस दिया गया है। भारत सरकार तो बीफ बाहर भेजकर पैसे कमा रही है। क्या सरकार इसे बंद करेगी? उन्होंने कहा कि ईद की नमाज पढ़ने के लिए सरकार को हमें बड़ा मैदान देना चाहिए। अगर मैदान की व्यवस्था नहीं होगी, तो सड़क पर नमाज पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वहीं, सड़क पर नमाज के खिलाफ भाजपा नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि तुष्टीकरण के खिलाफ है। जब सड़कों पर नमाज पढ़ने की बात आती है, तो यूएई, सऊदी अरब या ईरान जैसे इस्लामिक देशों में भी सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक है। इसलिए, इसे धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। बता दें कि पश्चिम बंगाल सरकार ने एक औपचारिक सार्वजनिक सूचना जारी की है। इसमें फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना गाय और भैंस के वध पर सख्त प्रतिबंध को दोहराया गया है। 27 मई को बकरीद से पहले सरकार ने यह नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है कि बिना प्रमाण पत्र के किसी भी बैल, बछड़े, गाय या भैंस का वध नहीं किया जा सकता। प्रमाण पत्र पर दो अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर होने चाहिए। उल्लंघन को संज्ञेय अपराध माना जाएगा, जिसके लिए छह महीने तक की कैद और एक हजार रुपए तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।










































