उत्तराखण्ड
चारधाम यात्रा सुचारू रखने व आपदाओं से निपटने को प्रशासन ने कसी कमर, मानसून सीजन में विशेष तैयारी
सीएन, रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा सुचारू है। देशभर से पहुंच रहे भक्तों में खासा उत्साह नजर आ रहा है। शनिवार को केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब की यात्रा जारी रही। बारिश से बदरीनाथ हाईवे पर पीपलकोटी के पास भनैरपानी भूस्खलन जोन में एक घंटे यातायात बाधित रहा । हालांकि पहाड़ी से पत्थर गिरने के चलते पुलिस की देखरेख में हाईवे पर वाहनों की आवाजाही कराई गई। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार को स्यानाचट्टी के पास भूस्खलन के चलते करीब दो घंटे तक यातायात ठप रहा। इस कारण यमुनोत्री धाम के दर्शन को आ रहे व दर्शन कर लौट रहे यात्री वाहनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ी। वहीं आगामी मानसून सीजन को देखते हुए श्री केदारनाथ धाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्बाध बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की अध्यक्षता में विभिन्न यात्रा सेक्टरों में तैनात किए जाने वाले सेक्टर अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मानसून के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, घोड़ा-खच्चर संचालन, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता और दर्शन व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि मानसून काल में यात्रा मार्ग पर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतना सभी अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि जोखिम वाले स्थानों पर संचालित दुकानों एवं अस्थायी प्रतिष्ठानों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। बैठक में जिला आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, पशुपालन, पुलिस तथा जिला पंचायत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सेक्टर मजिस्ट्रेटों को उनके दायित्वों और कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निगरानी बनाए रखें तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी दुर्घटना या आपदा की स्थिति में श्रद्धालुओं के शीघ्र रेस्क्यू के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। आवश्यकता पड़ने पर हेली रेस्क्यू सहित अन्य राहत एवं बचाव कार्यों को भी तत्काल संचालित किया जाए।








































