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महाकुंभ: सुबह से शाम तक कहां-कहां घूम सकते हैं, चार प्रकार से माना गया है आयोजन

महाकुंभ: सुबह से शाम तक कहां-कहां घूम सकते हैं, चार प्रकार से माना गया है आयोजन
सीएन, प्रयागराज।
इन दिनों प्रयागराज त्रिवेणी संगम के तट पर महाकुंभ चल रहा है। आदि काल से ही हिन्दू धर्मावलम्बियों की जागृत चेतना को बिना किसी आमन्त्रण के खींच कर ले आता है। कुम्भ पर्व किसी इतिहास निर्माण के दृष्टिकोण से नहीं शुरू हुआ था अपितु इसका इतिहास समय के प्रवाह से साथ स्वयं ही बनता चला गया। वैसे भी धार्मिक परम्पराएं हमेशा आस्था एवं विश्वास के आधार पर टिकती हैं न कि इतिहास पर। यह कहा जा सकता है कि कुम्भ जैसा विशालतम मेला संस्कृतियों को एक सूत्र में बांधे रखने के लिए ही आयोजित होता है। महाकुंभ का मेला 13 जनवरी 2025 से शुरू हुआ था जो 26 फरवरी 2025 तक चलेगा। अब तक करोड़ों लोग संगम में स्नान कर चुके हैं और रोजाना लाखों लोग पहुंच रहे हैं। महाकुंभ में लोग संगम स्नान के लिए जा रहे हैं। संगम स्नान के बाद एक दिन में कहां-कहां घूम सकते हैं। संगम में स्नान के लिए सबसे पहले त्रिवेणी संगम पहुंचे। यहां पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है। पवित्र नदी में स्नान करें। आप बोट के जरिए संगम में डुबकी लगा सकते हैं। प्रयागराज के संगम तट पर बड़े हनुमान जी का मंदिर स्थित है। यहां पर हनुमान जी की अनोखी मूर्ति लेटी हुई अवस्था में है। संगम में स्नान के बाद हनुमान जी के दर्शन अवश्य करें। तभी स्नान सफल माना जाता है। महाकुंभ में स्नान और हनुमान मंदिर के दर्शन के बाद अखाड़े की तरफ रुख करें। महाकुंभ में साधु-संत के कई अखाड़े हैं। यहां पर साधुओं की परंपराओं और दैनिक गतिविधियों को देख सकते हैं। ऐसा अनुभव सिर्फ महाकुंभ में ही कर सकते हैं। शिवालय पार्क जाएं महाकुंभ में घूमने के बाद शिवालय पार्क में जा सकते हैं। शिवालय पार्क में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकते हैं। इस पार्क में शांतिपूर्ण माहौल में ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकते हैं। शास्त्री ब्रिज शास्त्री ब्रिज पहुंच कर यहां से महाकुंभ का नजारा देख सकते हैं। इस ब्रिज से अंधेरे में रोशनी से जगमगाता हुआ पूरा कुंभ क्षेत्र देख सकते हैं। यहां से आपको अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। शाम को देखें गंगा आरती शाम होने के बाद गंगा घाट पर गंगा आरती में शामिल हो। इसके साथ ही आप लेजर शो देख सकते हैं। शाम के समय घाटों पर घूमकर दिव्य अनुभव ले सकते हैं। ज्योतिष गणना के क्रम में कुम्भ का आयोजन चार प्रकार से माना गया है। बृहस्पति के कुम्भ राशि में तथा सूर्य के मेष राशि में प्रविष्ट होने पर हरिद्वार में गंगा.तट पर कुंभ पर्व का आयोजन होता है। बृहस्पति के मेष राशि चक्र में प्रविष्ट होने तथा सूर्य और चन्द्र के मकर राशि में आने पर अमावस्या के दिन प्रयागराज में त्रिवेणी संगम तट पर कुम्भ पर्व का आयोजन होता है। बृहस्पति एवं सूर्य के सिंह राशि में प्रविष्ट होने पर नासिक में गोदावरी तट पर कुंभ पर्व का आयोजन होता है। बृहस्पति के सिंह राशि में तथा सूर्य के मेष राशि में प्रविष्ट होने पर उज्जैन में शिप्रा तट पर कुंभ पर्व का आयोजन होता है।

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