राष्ट्रीय
लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता व शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की बेमियादी भूख हड़ताल का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा
सीएन, दिल्ली। लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धम्रेंद प्रधान के त्यागपत्र की मांग को लेकर चल रहे बेमियादी भूख हड़ताल का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है. करीब ढाई सप्ताह से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई है. इसमें अदालत से उनकी जान बचाने के लिए तत्काल दखल देने की मांग की गई है. इसी के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या कोई अदालत किसी व्यक्ति की भूख हड़ताल खत्म करवाने या जबरन इलाज कराने का आदेश दे सकती है. दिल्ली हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दाखिल की है. इस याचिका में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे सोनम वांगचुक को तुरंत चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराएं, उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं और उनके उठाए मुद्दों पर संवाद शुरू करें. इस याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. इस दौरान उनका वजन करीब 8.25 किलोग्राम तक कम हो चुका है. उन्हें बार-बार ब्लड शुगर कम होने, चक्कर आने, मांसपेशियों के तेजी से कमजोर होने और अत्यधिक थकान जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. याचिकाकर्ता का दावा है कि अगर अनशन जारी रहा तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है. याचिका में यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और भूख हड़ताल लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन किसी नागरिक का जीवन बचाना भी राज्य की समान रूप से संवैधानिक जिम्मेदारी है. ऐसे में अगर सरकार किसी व्यक्ति की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद कोई कदम नहीं उठाती, तो यह अपने सार्वजनिक और संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन न करने के समान होगा. याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि अगर जरूरत पड़े तो सोनम वांगचुक को तरल पेय, प्रोटीन, विटामिन और अन्य जरूरी चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति और खराब होने से रोकी जा सके. साथ ही सरकार को उनके साथ बातचीत शुरू करने का भी निर्देश दिया जाए, जिससे आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके


























