नैनीताल
नैनीताल में गणमान्य नागरिकों से संवाद का घटता अवसर, चुनिंदा लोगों से औपचारिक मिलन : पूरन महरा
सीएन, नैनीताल। राज्य आंदोलनकारी व भाजपा नेता पूरन महरा ने वीआईपी, राजनेताओं के नैनीताल आगमन पर गणमान्य नागरिकों से संवाद का घटते अवसर पर घोर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नैनीताल का स्तर लगातार गिरता हुआ प्रतीत हो रहा है। अब चुनिंदा ऐसे लोग संवाद के लिए बुलाये जा रहे हैं जो शहर की समस्याओं की नही वरन खुद की समस्याओं को सामने रखते है। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि पहले जब कोई वीआईपी अथवा वरिष्ठ अधिकारी नगर में आते थे, तो उन्हें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य, अनुभवी और जागरूक नागरिकों से मिलने का अवसर दिया जाता था। इससे नगर की समस्याओं, विकास और सौंदर्यीकरण पर सार्थक चर्चा होती थी। वर्तमान में यह संवाद सीमित होकर कुछ चुनिंदा लोगों तक सिमटता जा रहा है, जिसके कारण अनेक महत्वपूर्ण सुझाव और जनभावनाएं निर्णय प्रक्रिया तक नहीं पहुँच पाती हैं। यह चुनिंदा लोग नगर की ज्वलंत समस्याओं से नही बल्कि अपनी समस्याओं को प्राथमिकता देने में गुरेज़ नही करते। कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश लोग वह हैं जो सत्ता बदलने के साथ ही अपना चोला बदल देते हैं। अब प्रशासन व संबंधित दलों के लोग शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य, अनुभवी और जागरूक नागरिकों से मिलने का अवसर नही देते। बरसाती मेढक व अवसरवादी लोग बाजीगर बन जाते हैं। ऐसा इसलिए भी यदि जागरूक व विषय विशेषज्ञ तथाकथित योजनाकारों की.ढोल की पोल.न.खोल.दे। जी सर सब चंगा है…की रट लगाने वालों ने नैनीताल को मरीज बना कर मरणासन्न हालातों की ओर धकेलने में कोई कोरकसर नही छोड़ रखी है। वैसे तो नैनीताल नेताविहीन शहर के रूप में कुख्यात है ही.वही दलालनुमा लोगों की भरमार ने कोढ़ में खाज का काम कर दिया है। 10 से.20 साल पहले आये लोग.नैनीताल के रहनुमाई करने लगे तो इसे क्या नाम देंगे और क्या उम्मीद करेंगे। यही कारण है कि बाहर से अप्रीतम लगने वाला विश्वप्रसिद्ध नैनीताल अंदर से जार-जार रो रहा है।






































