Connect with us

उत्तराखण्ड

एससी से यूके सरकार को झटका : अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर दखल नहीं, कहा-थाने में आग लगा देने से यूएपीए लागू नहीं होता

सीएन, नई दिल्ली। हल्द्वानी के वनभूलपुरा हिंसा में आतंकवाद निरोधक कानून गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) लागू किए जाने पर चिंता जाहिर की। शीर्ष अदालत ने उत्तराखंड सरकार से पूछा कि भीड़ द्वारा थाने में आग लगा देने भर से ‘यूएपीए’ कैसे लागू हो सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने उत्तराखंड सरकार की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। राज्य सरकार ने 2024 में वनभूलपुरा हिंसा के आरोपी अब्दुल मलिक को हाईकोर्ट से मिली जमानत को चुनौती दी थी। पीठ ने मलिक की जमानत बहाल रखते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश में दखल से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि भले ही फैसले में हाईकोर्ट का तर्क अधूरा रहा हो, लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामले में दखल देने का कोई ठोस कारण नहीं है। उत्तराखंड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि हाईकोर्ट ने फैसले के समय यूएपीए की धारा 43डी (5) पर विचार नहीं किया।न्यायमूर्ति बागची ने मामले में यूएपीए लागू किए जाने पर सवाल उठाया। ‘यदि कोई भीड़ जाकर पुलिस स्टेशन जला देती है, तो क्या उस पर सीधे आतंकवाद निरोधक कानून ‘यूएपीए’ लागू हो जाएगा? भाटिया ने कहा कि अगर सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो तो यूएपीए लागू होता है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि ‘सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा’ के बीच अंतर है। सीजेआई सूर्यकांत ने जमानत आदेश में दखल से इनकार किया। कहा सिर्फ इसलिए अपीलीय दखल की जरूरत नहीं है कि हाईकोर्ट का तर्क अधूरा हो सकता है। इन तथ्यों में, हमें वास्तव में हाईकोर्ट से विस्तृत आदेश की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वह दो साल से हिरासत में था। भले ही गलत कारण से जमानत दी हो, हमें दखल नहीं देना चाहिए। राज्य सरकार के गंभीर आरोप होने की दलील पर जस्टिस बागची ने कहा कि यदि आरोप इतने गंभीर थे, जितना आप (राज्य सरकार) दावा कर रहे हैं, तो अब तक ट्रायल पूरा कर आरोपी सजा हो जानी चाहिए थी। अगर पुलिस का मनोबल गिरना आपकी चिंता है, तो दो साल में सजा दिलवा देनी चाहिए थी। आप बुरी तरह विफल रहे हैं।’ सीजेआई सूर्यकांत ने जमानत आदेश में दखल से इनकार किया। कहा सिर्फ इसलिए अपीलीय दखल की जरूरत नहीं है कि हाईकोर्ट का तर्क अधूरा हो सकता है। इन तथ्यों में, हमें वास्तव में हाईकोर्ट से विस्तृत आदेश की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वह दो साल से हिरासत में था। भले ही गलत कारण से जमानत दी हो, हमें दखल नहीं देना चाहिए। राज्य सरकार के गंभीर आरोप होने की दलील पर जस्टिस बागची ने कहा कि यदि आरोप इतने गंभीर थे, जितना आप (राज्य सरकार) दावा कर रहे हैं, तो अब तक ट्रायल पूरा कर आरोपी सजा हो जानी चाहिए थी। अगर पुलिस का मनोबल गिरना आपकी चिंता है, तो दो साल में सजा दिलवा देनी चाहिए थी। आप बुरी तरह विफल रहे हैं।’.सीजेआई सूर्यकांत ने जमानत आदेश में दखल से इनकार किया। कहा सिर्फ इसलिए अपीलीय दखल की जरूरत नहीं है कि हाईकोर्ट का तर्क अधूरा हो सकता है। इन तथ्यों में, हमें वास्तव में हाईकोर्ट से विस्तृत आदेश की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वह दो साल से हिरासत में था। भले ही गलत कारण से जमानत दी हो, हमें दखल नहीं देना चाहिए। राज्य सरकार के गंभीर आरोप होने की दलील पर जस्टिस बागची ने कहा कि यदि आरोप इतने गंभीर थे, जितना आप (राज्य सरकार) दावा कर रहे हैं, तो अब तक ट्रायल पूरा कर आरोपी सजा हो जानी चाहिए थी। अगर पुलिस का मनोबल गिरना आपकी चिंता है, तो दो साल में सजा दिलवा देनी चाहिए थी। आप बुरी तरह विफल रहे हैं।’

ADVERTISEMENTS
यह भी पढ़ें 👉  पत्रकार प्रेस महासंघ उत्तराखंड कार्यकारिणी का विस्तार, अर्जुन सिंह अर्जुंदा बने प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष
Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

More in उत्तराखण्ड

Trending News

Follow Facebook Page

About

आज के दौर में प्रौद्योगिकी का समाज और राष्ट्र के हित सदुपयोग सुनिश्चित करना भी चुनौती बन रहा है। ‘फेक न्यूज’ को हथियार बनाकर विरोधियों की इज्ज़त, सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने के प्रयास भी हो रहे हैं। कंटेंट और फोटो-वीडियो को दुराग्रह से एडिट कर बल्क में प्रसारित कर दिए जाते हैं। हैकर्स बैंक एकाउंट और सोशल एकाउंट में सेंध लगा रहे हैं। चंद्रेक न्यूज़ इस संकल्प के साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दो वर्ष पूर्व उतरा है कि बिना किसी दुराग्रह के लोगों तक सटीक जानकारी और समाचार आदि संप्रेषित किए जाएं।समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को समझते हुए हम उद्देश्य की ओर आगे बढ़ सकें, इसके लिए आपका प्रोत्साहन हमें और शक्ति प्रदान करेगा।

संपादक

Chandrek Bisht (Editor - Chandrek News)

संपादक: चन्द्रेक बिष्ट
बिष्ट कालोनी भूमियाधार, नैनीताल
फोन: +91 98378 06750
फोन: +91 97600 84374
ईमेल: [email protected]

BREAKING