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रामलला मंदिर चढ़ावा चोरी में केन्द्र सरकार के लिये अपनी विश्वसनीयता बचा पाना बहुत बड़ी चुनौती

राजीव लोचन साह, नैनीताल। अयोध्या में राम मन्दिर में हुए भ्रष्टाचार की घटना के उजागर होने से केवल हिन्दू धर्मावलम्बी ही नहीं, बल्कि पूरा देश सकते में है। हालाँकि यह अप्रत्याशित नहीं था। नवम्बर 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद राम मन्दिर निर्माण का रास्ता साफ हो जाने के बाद ऐसी चर्चायें शुरू हो गयी थीं कि इस मामले में धर्म या आस्था जैसा कुछ नहीं है। केन्द्र की भाजपा सरकार के लिये यह चुनाव जीत कर सत्ता में बने रहने का और भाजपा के करीब रहने वाले उद्योगपतियों और व्यवसायियों के लिये पैसा कमाने का बहुत बड़ा जरिया है। भारत में व्यावसायिक मीडिया, जिसे अब गोदी मीडिया के नाम से जाना जाता है, सच्ची खबरें देने से परहेज करता है। परन्तु ऐसे समाचार छन-छन कर सामने आने लगे थे कि अयोध्या में जमीनों की करोड़ो रुपये की खरीद-फरोख्त शुरू हो गई है और राम जन्मभूमि ट्रस्ट इस धंधे में गले-गले तक डूबा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने राम मन्दिर को 2024 का लोक सभा चुनाव जीतने के लिये एक अवसर बनाया और ‘अब की बार 400 पार’ का नारा दे दिया। हिन्दू धर्म के मर्मज्ञों, यहाँ तक कि चारों शंकराचार्यों की आपत्तियों को दरकिनार कर अधूरे बने मन्दिर में प्राण प्रतिष्ठा कर दी गयी और प्रधानमंत्री अकेले उस कार्यक्रम में बैठे। जबकि हर हिन्दू जानता है कि छोटी सी पूजा में भी यजमान बगैर पत्नी के नहीं बैठता। सरकार और सरकारपरस्त मीडिया की कोशिशों से जनवरी 2024 में पूरे देश में भक्ति और श्रद्धा का जबर्दस्त माहौल बनाया गया। इसके बावजूद भाजपा को लोकसभा चुनाव में वैसी सफलता नहीं मिली, जैसी उसने उम्मीद की थी और अब तो राम मन्दिर से जुड़ी भ्रष्टाचार और धंधेबाजी की कहानियाँ भी आम हो गयी हैं। निर्माण कार्यों में हुआ भ्रष्टाचार पहली बरसात में हुई टूटफूट से ही जाहिर हो गया था और अब तो चढ़ावे की चोरी भी पूरी तरह सामने आ गयी है। इस घटना के बाद केन्द्र सरकार के लिये अपनी विश्वसनीयता बचा पाना बहुत बड़ी चुनौती होगा।

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