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संस्कृति

आज है बाराबफात : पैगंबर की जिंदगी, उनके संदेश व उनकी शिक्षाओं को याद करने का दिन

सीएन, नैनीताल। मिलाद उन नबी, जिसे ईद-ए-मिलाद या बारावफात भी कहा जाता है, मुस्लिम समुदाय के महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों में से एक है। यह दिन पैगंबर हजरत मुहम्मद के जन्म की याद में मनाया जाता है। भारत में इस अवसर पर मस्जिदों और घरों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोग पैगंबर की जिंदगी, उनके संदेश और उनकी शिक्षाओं को याद करते हैं।इस साल ईद ए मिलाद उन नबी अगस्त 2026 में मनाई जा रही है। मिलाद उन नबी 2026 की तारीख को लेकर कैलेंडर और स्थानीय चांद देखने की परंपरा के कारण अंतर मिल सकता है। भारत में पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन यानी ईद-ए-मिलाद 26 अगस्त 2026 को है। इस दिन को कुछ इस्लामी कैलेंडर 12 रबी अल-अव्वल 1448 हिजरी के साथ जोड़ते हैं। इस दिन का मुख्य उद्देश्य पैगंबर की शिक्षाओं को याद करना और उनके बताए दया, करुणा, भाईचारे तथा इंसानियत के संदेश पर अमल करने की प्रेरणा लेना माना जाता है। आइए जानते हैं मिलाद उन नबी क्यों मनाया जाता है और इस दिन किस तरह की परंपराएं निभाई जाती हैं।भारत में 26 अगस्त, बुधवार को ईद-ए-मिलाद मनाई जा रही है। हालांकि धार्मिक पर्वों की तारीख स्थानीय चांद देखने और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग बताई जा सकती है, इसलिए स्थानीय धार्मिक संस्थाओं की घोषणा को भी ध्यान में रखना उचित है। मिलाद उन नबी पैगंबर हजरत मुहम्मद के जन्म और उनके जीवन व शिक्षाओं की स्मृति से जुड़ा अवसर है। इस मौके पर उनके जीवन, चरित्र और इंसानियत से जुड़े संदेशों को याद किया जाता है। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार, इस अवसर पर प्रेम, करुणा और एकता जैसे मूल्यों पर भी जोर दिया जाता है।  मिलाद उन नबी के अवसर पर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। कई जगह मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर विशेष दुआ और धार्मिक सभाएं होती हैं। पैगंबर के जीवन और शिक्षाओं पर तकरीरें की जाती हैं तथा नात पढ़ी जाती हैं। कुछ स्थानों पर जुलूस भी निकाले जाते हैं और घरों व धार्मिक स्थलों को रोशनी से सजाया जाता है।  कई समुदायों में जरूरतमंदों की मदद, भोजन वितरण और लोगों के बीच सद्भाव बढ़ाने वाली गतिविधियां भी इस अवसर का हिस्सा होती हैं। हालांकि रस्में और आयोजन क्षेत्र तथा समुदाय की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।

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