उत्तराखण्ड
सावधान : उत्तराखंड के आधा गांवों व जंगलों को खा गया लैन्टाना, अब खा रही बनमारा यानी कम्युनिस्ट घास….
चन्द्रेक बिष्ट, नैनीताल। उत्तराखंड के जंगलों, गांवों, कस्बों व शहरों में बनमारा यानी कम्युनिस्ट घास, रौड़ा, कालाबासा नाम से जाने वाली खतरनाक वनस्पति जिसे साइंस में एगरेटिना एडेनोफोरा कहा जाता है, बड़ी तेजी से अतिक्रमण कर रहा है। विश्व प्रसिद्ध नैनी झील के चारों आओर व शहरी वनों में यह लगातार अतिक्रमण कर रहा है। कालाबासा एक खतरनाक आक्रामक खरपतवार है जो स्थानीय वनस्पतियों, जैव विविधता और मिट्टी की सेहत को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। यह लम्बे अर्से से उत्तराखंड के जंगलों से होते हुए गांव व कस्बों व शहरों में तेजी से फैल.रहा है। आश्चर्य यह है कि अब यह नैनी झील सहित नैनीताल जिले के तमाम झीलों के तटों, जल स्रोतों, नदी-नालों तक में अतिक्रमण करते हुए देखा जा रहा है। बनमारा इतनी तेजी से फैलता है कि यह स्थानीय घास और छोटे पौधों की जगह ले लेता है। यह प्राकृतिक रूप से उगने वाले उपयोगी पेड़ों के नए पौधों (सीडलिंग) को पनपने नहीं देता। यह पौधा मिट्टी में ऐसे विषैले रसायन छोड़ता है जो अन्य पौधों और फसलों के विकास को रोक देते हैं। इसके अत्यधिक फैलाव से जंगल की मूल संरचना नष्ट हो जाती है और स्थानीय प्रजातियां विलुप्त होने लगती हैं। यह पौधा पशुओं को पसंद नहीं आता, जिससे जंगलों और घास के मैदानों में मवेशियों के लिए पौष्टिक चारे की उपलब्धता कम हो जाती है। घोड़ों और कुछ अन्य पालतू पशुओं के लिए यह ज़हरीला साबित होता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। जानकारों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में यह हिंसक वन्य. जीवों के छिपने का मुफीद कारण भी बन गया है। हालांकि इसे औषधि के रूप में प्रयोग करने की बात कही जाती है। लेकिन यह नुकसान अधिक पहुचा रही है। सबसे अधिक नुकसान ग्रामीण फसल उत्पादन पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों की माने तो यह लैन्टाना यानी कुरी वनस्पति से.भी खतरनाक साबित हो रही है। मैक्सिको से भारत के हिमाचल व उत्तराखंड के पर्वतीय. क्षेत्रों में फैल रही इस खतरनाक वनस्पति के उन्मूलन के लिए प्रशासन व शा,न के पास कोई ठोस कार्ययोजना भी नही है। वन व कृषि महकमे मौन बने हुए हैं। कुमाऊं विश्व विद्यालय डीएसबी परिसर नैनीताल के वनस्पति विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी का कहना है कि कालाबासा वनस्पति मूल रूप से मैक्सिको देश की प्रजाति है। मैक्सिको से भारत के हिमाचल व उत्तराखंड के पर्वतीय. क्षेत्रों में फैल रही इस खतरनाक वनस्पति के उन्मूलन के लिए ठोस कार्ययोजना शुरू करने की जरुरत है। यह पौधा मिट्टी में ऐसे विषैले रसायन छोड़ता है जो अन्य पौधों और फसलों के विकास को रोक देते हैं। इसके अत्यधिक फैलाव से जंगल की मूल संरचना नष्ट हो जाती है और स्थानीय प्रजातियां विलुप्त होने लगती हैं। इससे पहले लैन्टाना यानी कुरी ने खेती किसानी को नुकसान पहुंचा रही है और अब कालाबासा का प्रसार बहुत तेजी से बढ़ना खतरे की घंटी है।


























