राजनीति
भाजपा की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट : उत्तराखंड के 32 विधायकों की हो सकती है छुट्टी, नैनीताल जिले से मोहन बिष्ट, सरिता, बंशीधर, दीवान बिष्ट के नाम शामिल, क्षेत्रीय असंतोष प्रमुख कारण
सीएन, देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर टिकट को लेकर हलचल तेज होने की खबर है। एक आंतरिक सर्वे रिपोर्ट से दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 32 फीसदी इलाकों के प्रदर्शन को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आई है। इसके चलते आगामी विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर नए चेहरों को मौका दिए जाने की संभावना सामने जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा ने अपने हिस्से की 47 विधानसभा सीटों पर आंतरिक सर्वे कराया है। इसमें 32 सीटों के खिलाफ क्षेत्रीय स्तर पर असंतोष की बात सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, भाजपा की ओर से इस कथित 32 टिकटों वाली सूची की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे पार्टी की अंतिम टिकट सूची या आधिकारिक निर्णय नहीं माना जा सकता। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जनता में राज्य सरकार के मुकाबले स्थानीय इलाकों के काम को लेकर ज़्यादा असंतोष बताई गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लोगों ने सरकार के स्तर पर हुए विकास कार्यों को स्वीकार किया, लेकिन अपने विधानसभा क्षेत्रों में इलाकों के काम और सक्रियता को लेकर संतोष नहीं जताया। कुछ क्षेत्रों में एडमिनिस्ट्रेटिव स्तर पर लापरवाही और युवाओं में नाराजगी की बात भी सर्वे के शॉर्टकट से कही गई है। सूची में अलग-अलग जिलों के कई मौजूदा भाजपा विधायकों के नाम बताए जा रहे हैं। देहरादून जिले से डोईवाला विधानसभा बृजभूषण गैरोला, कैंट सविता कपूर, ऋषिकेश प्रेमचंद अग्रवाल, मसूरी गणेश जोशी, पौड़ी जिले से यमकेश्वर: रेनू बिष्ट, पौड़ी: राजकुमार पोरी पिथौरागढ़ से गंगोलीहाट: फकीर राम टम्टा, डीडीहाट: बिशन सिंह चुफाल, बागेश्वर से पार्वती दास, अल्मोड़ा से रानीखेत प्रमोद नैनवाल, जागेश्वर मोहन सिंह,.सल्ट महेश जीना, नैनीताल जिले से लालकुआं मोहन सिंह बिष्ट, नैनीताल, सरिता आर्य, कालाढूंगी बंशीधर भगत, रामनगर दीवान सिंह बिष्ट ऊधमसिंह नगर से रुद्रपुर: शिव अरोड़ा, उत्तरकाशी से गंगोत्री सुरेश चौहान, पुरोला: दुर्गेश्वर लाल, टिहरी से किशोर उपाध्याय, हरिद्वार से रुड़की: प्रदीप बत्रा, चमोली से थराली भोपाल राम टम्टा के.नाम शामिल हैं। कथित सर्वे के आधार पर दावा किया जा रहा है कि भाजपा उन विधानसभा सीटों पर नए विधायकों को उठाने पर विचार कर सकती है, जहां मौजूदा विधायक के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी अधिक है। पार्टी के लिए यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की चुनौती लेकर आएगा। ऐसे में स्थानीय स्तर की एंटी-इनकंबेंसी को कम करना पार्टी की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल 32 जिलों के टिकट काटने की खबर और आंतरिक सर्वे रिपोर्ट पर आधारित है। भाजपा की ओर से अभी यह आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है कि इन सभी जिलों के टिकट कट जाएंगे। अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व आगामी चुनावी समीकरण, संभावित रिपोर्ट, स्थानीय विवाद और संभावित फैसलों के आकलन के बाद करेगा। 2027 से पहले सामने आई यह कथित सर्वे रिपोर्ट अगर सही है, तो भाजपा के कई मौजूदा विधायकों के लिए आने वाले महीने बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। देखना होगा कि सरकार चुनाव से पूर्व स्थानीय स्तर की एंटी-इनकंबेंसी को कम करना पार्टी की रणनीति बन सकती है। फिलवक्त कई विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के मौजूदा विधायकों के साथ ही कई संभावित चेहरे भी जनसंपर्क में जुटे हुए हैं।





























