धर्मक्षेत्र
कदली वृक्ष के चयन को श्री राम सेवक सभा का दल नैनीताल से मंगोली गांव पहुंचा, पूजित तनों से निर्मित होंगी मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाएं
सीएन, नैनीताल। श्री नन्दा देवी महोत्सव नैनीताल के 124 वें वर्ष की यात्रा में कदली वृक्ष के चयन हेतु श्री राम सेवक सभा का दल मंगोली गांव पहुंचा तथा वहां मंदिर में विधि विधान से कदली वृक्ष का पूजन किया गया तथा परंपरा अनुसार अक्षत डाले गए। मालूम हो कि परम्परा के अनुसार चयनित कदली वृक्षों को ढोल नगाड़ों के साथ महोत्सव के दौरान नैनीताल लाया जायेगा। नगर भ्रमण व विधिवत पूजन के बाद कदली वृक्षों के तनों से मां नंदा सुनंदा की प्रतिमाओं का निर्माण किया जायेगा। इस वर्ष नंदा महोत्सव 16 से 23 सितंबर तक मनाया जा रहा है। जानकारों के अनुसार कदली (केला) का धार्मिक, आध्यात्मिक और आयुर्वेदिक दोनों दृष्टियों से अत्यधिक महत्व है। कदली में देवताओं का वास माना जाता है। इसमें देवगुरु बृहस्पति, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास माना गया है। केले में प्रचुर मात्रा में पोटैशियम, मैग्नीशियम, फाइबर, विटामिन बी 6 और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य, पाचन और सम्पूर्ण प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करते हैं। विभिन्न अंगों के उपयोग किया जाता है। कदली मा नंदा सुनंदा की मूर्ति का आधार है। वैदिक परंपरा में कदली (केले का वृक्ष और उसका फल) को केवल एक साधारण पौधा नहीं, बल्कि देववृक्ष और अत्यंत पवित्र वनस्पति माना गया है। वेदों, उपनिषदों और उनसे जुड़े पौराणिक वांग्मय में प्रकृति पूजा को सर्वोपरि स्थान दिया गया है, जिसमें कदली का विशेष महत्व है। वैदिक यज्ञों में कदली जिसका प्रत्येक भाग (पत्ता, तना, फूल और फल) पूरी तरह से शुद्ध और पवित्र माना जाता है। विष्णु पुराण के एक सूक्त के अनुसार, “जिस प्रकार कदली वृक्ष के तने में केवल छाल और पत्ते ही दिखाई देते हैं, उसी प्रकार तुम संसार के मूल स्तंभ हो और सभी चीजें तुममें ही दिखाई देती हैं।”शास्त्रों के अनुसार, कदली के मूल (जड़) में भगवान विष्णु, मध्य में देवगुरु बृहस्पति और अग्रभाग में भगवान शिव का वास माना जाता है। इसके पीले रंग के फल और फूल के कारण इसे ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि का प्रतीक मानकर गुरु ग्रह की हेतु पूजा जाता है। कर्म बंधन से मुक्ति दायक तथा इसे ‘अकृष्टपच्य’ और निष्काम भावना का प्रतीक माना गया है। यह आत्मा के पुनर्जन्म और कर्म बंधनों से मुक्त शुद्ध आत्मा को दर्शाती है। मंगोली में कदली वृक्ष चयन के दौरान भजन भी आयोजित किए गए तथा मां नंदा सुनंदा के जयकारे लगे। इस अवसर पर बीडीसी सदस्य मुकेश मेहरा, दीवान सिंह, गोविंद सिंह, गणेश सिंह, हिम्मत सिंह, पंकज मेहरा, सचिन मेहरा, राजन सिंह, प्रधान दीवान सिंह, भगवान सिंह, नैन सिंह, चंदन सिंह, ममता मेहरा, हंसी मेहरा, तथा सभा की तरफ से बिमल चौधरी, भुवन बिष्ट, गोधन सिंह, हीरा, मोहित लाल साह एवं हरीश राणा ने कदली चयन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
















































