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स्व. निर्मल पांडे जन्मोत्सव पर प्रयोगांक नैनीताल के कलाकारों ने अंतिम युद्ध नाटक का जीवंत प्रस्तुतीकरण कर मन मोहा
सीएन, नैनीताल। नाटक ‘अंतिम युद्ध’ के माध्यम से युद्ध की विभीषिका और मानवीय संवेदनाओं के संकट को प्रयोगांक नैनीताल के कलाकारों द्वारा नैनीताल में जीवंत प्रस्तुतीकरण किया गया. नैनीताल निवासी सिने एवं रंगमंच अभिनेता-निर्देशक स्व. निर्मल पांडे जन्मोत्सव 2026 के अवसर 11 अगस्त 2026 की शाम युग मंच नैनीताल के गौरवशाली 50 वर्ष एवं प्रयोगांक नैनीताल की प्रस्तुति पर वरिष्ठ रंगकर्मी एच. एस. राणा द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘अंतिम युद्ध’ का मंचन 11 अगस्त 2026 को सायं जगदीश साह प्रेक्षागृह, सीआरएसटी मल्लीताल, नैनीताल में किया गया। निदेशक एवं लेखक एचएस राणा द्वारा बताया गया की तीसरे विश्वयुद्ध के बाद की विनाशकारी पृष्ठभूमि पर आधारित यह नाटक डिस्टोपियन और एब्सर्ड शैली में रचा गया है। युद्ध से बचने के लिए एक बंकर में छिपे चार लोगों के जीवन के माध्यम से नाटक मानवीय भूख, भय, प्रेम, विवेक, नैतिकता और जीवन के प्रति सम्मोहन को प्रभावशाली ढंग से सामने रखता है। नाटक में युद्ध की विभीषिका से उपजे जीवन-दर्शन और मानवीय मूल्यों के क्षरण को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। अंतिम युद्ध’ केवल देशों के बीच होने वाला युद्ध नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर की इंसानियत और उसकी पशुता के बीच होने वाले उस अंतिम संघर्ष की कहानी है, जिसमें मनुष्य अपनी सभ्यता और नैतिकता दोनों को खोता हुआ दिखाई देता है। यही नाटक का केंद्रीय और बेहद विचारोत्तेजक संदेश रहा। मंच पर मदन मेहरा ने पुरुष-1, सैनिक, रोबोट की भूमिका में, दीपक साहदेव ने पुरुष-2 की भूमिका में, राजेश आर्या ने बूढ़े आदमी की भूमिका में, योगिता तिवारी ने स्त्री की भूमिका में तथा उमेश कांडपाल ने सैनिक की आत्मा की भूमिका में प्रभावशाली अभिनय किया। सभी कलाकारों ने अपने-अपने पात्रों की मनःस्थितियों, तनाव और संवेदनाओं को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। नाटक के लेखक एवं निर्देशक एच. एस. राणा वर्ष 1974 से लगातार रंगमंच पर अभिनय एवं निर्देशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने ‘कफन’, ‘एक कफन और’, ‘चौराहे का मसीहा’, ‘और सुबह होने लगी’, ‘भूत बंगला’, ‘चोर गांव’, ‘गधा पच्चीसी’ तथा ‘अंतिम युद्ध’ सहित अनेक नाट्य कृतियों का लेखन किया है। मदन मेहरा ने सह-निर्देशन के साथ मंच पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच संयोजन में मुकेश धस्माना, मंजूर हुसैन, वीरेंद्र साह, विवेक खोलिया, नीरज डालाकोटी सहित अन्य रंगकर्मियों का सहयोग रहा। प्रकाश संयोजन अनिल कुमार, मंच सामग्री उमेश कांडपाल तथा मंच व्यवस्था एच. एस. राणा एवं मदन मेहरा द्वारा की गई। प्रयोगांक नैनीताल वर्ष 2001 से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय है तथा वर्ष 2006 में इसका सोसाइटी पंजीकरण ‘प्रयोगांक सोसायटी फॉर सोशल एंड एनवायरनमेंटल डेवलपमेंट, नैनीताल’ के नाम से हुआ। संस्था द्वारा अब तक अनेक पूर्णकालिक नाटकों का मंचन तथा विभिन्न प्रदेशों में 10,000 से अधिक नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुतियाँ की जा चुकी हैं। अंतिम युद्ध’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को युद्ध के वास्तविक अर्थ, मानवीय अस्तित्व, नैतिकता और सभ्यता के भविष्य पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया। अंत में एक नन्हे कलाकार भव्य मेहरा द्वारा कविता का पाठ किया गया. मंच संचालन उमेश कांडपाल द्वारा किया गया. इस अवसर पर प्रोफेसर लक्ष्मण सिंह बिष्ट बटरोही, प्रोफेसर धनेश पांडे, डॉ नारायण सिंह जंतवाल, जहूर आलम, मिथिलेश पांडे, आलोक साह, गीता साह, राजीव लोचन साह, जितेंद्र बिष्ट, मंजूर हुसैन, अनिल घिल्डियाल, जैसी राम आर्य, डॉ अनिल कार्की, चारु तिवारी, डीके शर्मा, हसन रजा, विक्रम सुयाल, श्री हर्षवर्धन वर्मा, आकाश नेगी, नीरज डालाकोटी, भास्कर बिष्ट, नवीन बेगाना, पवन कुमार, मनोज कुमार, अनुराग बिसारिया, अनवर रज़ा, नासिर अली, रोहित वर्मा, कौशल साह, अजय पवार, खुर्शीद, दिलावर सिराज आदि कला प्रेमी उपस्थित रहे, एवं नाटक व लेखन की सराहना की गई.





























